हिंदू संहिता : जारी - Page 217

202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सदस्यों को जो पहले ही चर्चा में भाग ले चुके हैं इन नए संशोधनों में भाग नहीं ले सकेंगे तथा न ही बोल सकेंगे। यह कोई नियम से संबंधित आपत्ति नहीं है। ये संशोधन महत्वपूर्ण हो सकते हैं और माननीय सदस्य जो अन्य संशोधनों के संदर्भ में पहले ही बोल चुके हैं, इन नए संशोधनों में भाग नहीं ले सकेंगे। लेकिन मौजूदा में, यदि ऐसे माननीय सदस्य हैं तो विचार करूँगा और उन्हें भी अवसर दूँगा, यदि आवश्यक हुआ....

डॉ. अम्बेडकर : एक सीमित संभावना।

माननीय उपाध्यक्ष : एक सीमित संभावना। लेकिन वे जो पहले बोल चुके हैं उस

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को नहीं दोहराएंगे। इसको छोड़कर, भविष्य में माननीय सदस्यों से मेरा अनुरोध है कि जब कोई खंड या उपखंड शुरू होता है तभी सभी संशोधनों को रखा जा सकता है। अन्यथा, हमें प्रक्रिया को दोहराते रहना होगा, सदस्यों को संशोधन रखने की अनुमति देनी होगी और फिर पूरे विषय पर फिर से जाना होगा।

मैंने डॉ. अम्बेडकर द्वारा आज रखे गए संशोधनों को सभा के समक्ष पहले ही रख दिया है। अब मैं आज रखे गए संशोधनों को सभा के समक्ष रखता हूँ। रखे गए संशोधन हैं :-

(1) श्री जे. आर. कपूर द्वारा प्रस्तावित संशोधन जिसकी संख्या 93, प्रस्तावित

खंड 2 में परंतुक जोडि़ए :-

‘‘बशर्तें कि विवाह और तलाक से संबंधित भाग 3 भाग 2 के प्रावधान केवल उन्हीं घोषणाकर्त्ताओं पर लागू होंगे। जब वर और वधू दोनों विवाह से पहले या पति और पत्नी दोनों विवाह के बाद, ऐसी घोषणा करते हैं।’’

(2) खंड 2 के स्थान पर-

‘‘2. संहिता का प्रयोज्य : यह संहिता भारत के सभी नागरिकों पर लागू होती है जो वयस्क होने के बाद लिखित रूप में घोषणा करते हैं कि वे इस संहिता के द्वारा शासित होंगे और इस घोषणा को केन्द्र सरकार द्वारा इस हेतु निर्धारित नियमों के अनुरूप पंजीकृत कराते हैं :

बशर्ते कि विवाह और तलाक से संबंधित भाग दो के प्रावधान केवल उन्हीं घोषणाकर्ताओं पर लागू होगा। जब वर और वधू दोनों विवाह से पहले या पति और पत्नी दोनों विवाह के बाद, इस तरह की घोषणा कर देते हैं।’’

(3) माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा रखे गए संशोधन संख्या 3, खंड 2 के उपखंड (1) में प्रस्तावित संशोधन में भाग (1) ( ii ) के बाद जोडि़ए :-