हिंदू संहिता : जारी - Page 219

204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘(3) उपखंड (3) के बाद, निम्नलिखित उप-खंड जोड़ा जाए, नामतः -’’

‘(4) यह संहिता या इसका कोई भाग या उसके कुछ भाग किसी भी दूसरे

व्यक्ति पर जो वयस्क होने के पश्चात् लिखित रूप से घोषणा करता है

कि वह एक संहिता, इसके किसी भाग या कुछ भागों, जैसी भी स्थिति

के द्वारा शासित होगा केन्द्र सरकार द्वारा इस हेतु निर्धारित नियमों के

अनुसार ऐसी घोषणा को पंजीकृत कराता है;’

बशर्तें कि विवाह और तलाक से संबंधित भाग दो के प्रावधान केवल उन्हीं घोषणाकर्त्ताओं पर लागू होंगे, जब वर और वधू दोनों ही विवाह से पहले और पति एवं पत्नी दोनों विवाह के बाद ऐसी घोषणा कर चुके हैं।’’

(10) खंड 2 के उप-खंड (1) के भाग (क) ‘‘हिंदू, अर्थात् सभी व्यक्ति जो हिंदू धर्म का पालन कर रहे हैं’’ के लिए प्रतिस्थापित करें ‘‘व्यक्ति जो धर्म से हिंदू है।’’

(11) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (क) में ‘‘सदस्यों’’ के लिए ‘‘अनुयायी’’ स्थानापन्न।

(12) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ख) को छोडि़ए।

(13) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ख) के लिए (ख) किसी भी व्यक्ति जो धर्म से जैन है के लिए ‘‘स्थानापन्न’’।

(14) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ख) में ‘‘जैन या सिख’’ के लिए स्थानापन्न ‘‘या जैन’’।

(15) खंड 2, जहाँ भी ‘‘ सिख’’ है उसका है उसका लोप करें।

(16) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ग) ( i ) में ‘‘अवैध’’ के बाद जोडि़ए-

‘‘जो, यदि उसने 18 वर्ष की उम्र पूरी कर ली है, स्वयं एक हिंदू है और।’’

(17) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ग) ( i ) में ‘‘माता-पिता हैं’’ के बाद ‘‘या रहे हैं’’ जोडि़ए।

(18) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ग) ( ii ) के बाद जोडि़ए-

‘‘( iii ) राज्य द्वारा पालन-पोषण किए गए किसी भी अनाथ या परित्यक्त बच्चे पर।’’

(19) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (घ) में अंत में जोडि़ए-

‘‘धर्मान्तरण से पूर्व उसके अधिकारों और दायित्वों के अध्याधीन।’’