हिंदू संहिता : जारी - Page 220

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(20) खंड 2 के उपखंड (1) के बाद, जोडि़ए -

‘‘(1क) यह संहिता अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों पर प्रयोज्य नहीं होगी।’’

(21) खंड 2 के उपखंड (2) को छोडि़ए।

(22) खंड 2 के उपखंड (2) के लिए स्थानापन्न-

‘‘(2) यह संहिता किसी भी व्यक्ति, भले ही उसका कोई भी धर्म हो, पर लागू होती है, जो इसमें उल्लिखित किन्हीं विषयों पर संबंध में हिंदू विधि या उस विधि के अंश के रूप में किसी प्रथा या रीति से शासित रहा है।’’

(23) खंड 2 के उपखंड (12 के परन्तुक में, ‘‘उन विषयों के संबंध में’’ जिसका उल्लेख अंत में है के लिए स्थानापन्न :-

‘‘उन विषयों के मामले में जिसका व्यक्ति ने स्वेच्छा से चयन नहीं किया है।’’

(24) खंड 2 के उपखंड (3) का लोप करें।

(25) खंड 2 के उपखंड 3 के लिए, स्थानापन्न-

‘‘(3) इस संहिता में जहाँ भी ‘हिंदू’ अभिव्यक्ति है का अभिप्राय वह व्यक्ति होगा, जो धर्म से हिंदू नहीं है, तथापि इस संहिता के प्रावधानों द्वारा शासित होता है या इस वास्ते केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार शसित होने की घोषणा करता है।’’

(26) खंड 2 के उपखंड (3) में ‘‘तथापि शासित’’, के बाद ‘‘या शासित होने की इच्छा रखता है’’ जोड़ा जाए।

(27) खंड 2 के उप-खंड (4) का लोप करें।

(28) खंड-2 में, परंतुक जोड़ें :-

‘‘बशर्तें कि विवाह और तलाक, और उत्तराधिकार से संबंधित भाग दो या/और सात के प्रावधान किसी भी व्यक्ति पर तब तक लागू नहीं होंगे जब तक कि वयस्क होने के बाद वह लिखित रूप में यह घोषणा नहीं कर देता/देती है, जो भी स्थिति हो, कि उस पर प्रावधान लागू होंगे, और ऐसी घोषणा को केन्द्र सरकार के द्वारा इस हेतु निर्धारित नियमों के अनुसार’’ पंजीकृत कराता है।

पुनः बशर्तें कि विवाह और तलाक से संबंधित भाग दो के प्रावधान केवल ऐसे ही घोषणाकर्त्ता पर लागू होंगे। जब वर और वधू दोनों विवाह से पहले तथा पति