206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और पत्नी दोनों विवाह के पश्चात्, ऐसी घोषणा कर देते हैं।
(29) खंड 2 में परंतुक जोडि़ए-
‘‘फिर भी, उपर्युक्त खंडों में किसी भी बात के सम्मिलित होने पर भी इस संहिता के प्रवर्तन के पांच वर्षों के अंदर और अवयस्क के मामले में उसके वयस्क होने के पाँच वर्षों के अंदर, कोई भी व्यक्ति संसद द्वारा निर्धारित किसी प्राधिकारी के सामने और प्रक्रिया के अनुसार अपना नाम पंजीकृत नहीं करवाएगा/करवाएगी, पर यह संहिता प्रयोज्य नहीं होगी, बशर्तें कि वह इस संहिता द्वारा शासित होना नहीं चाहता/चाहती है।’’
(30) खंड 2 में परंतुक जोडि़ए :-
‘‘फिर भी इस धारा में किसी भी बात के सम्मिलित होने पर भी यह संहिता किसी भी व्यक्ति पर लागू नहीं होगी। जब तक कि वह व्यक्ति इस संहिता द्वारा शासित होने की अपनी इच्छा बताते हुए अपना नाम निर्धारित प्राधिकारी के पास तथा निर्धारित प्रक्रिया से पंजीकृत नहीं कराता है।’’
कार्यसूची में दूसरे संशोधन जिसके सामने तारांकित चिन्ह लगाए गए हैं और जो पिछले सत्र में भी प्रस्तुत किए गए थे, भी सभा के समझ प्रस्तुत हैं। खंड और संशोधन अब विचाराधीन होंगे।
मैं सदा की भांति माननीय सदस्यों से जिन्होंने अब तक इस खंड पर चर्चा में भाग नहीं लिया है वे अपनी जगह पर खड़े होने का अनुरोध करूँगा। जिन सदस्यों ने पहले भी वक्तव्य दे दिया है, किंतु अभी उठने वाले नए मुद्दों पर बोलना चाहते हैं तो मैं इस पर विचार करूँगा और यदि आवश्यक हुआ तो बाद में बोलने का अवसर दूँगा।
पंडित मालवीय (उत्तर प्रदेश) : श्रीमान्, क्या आप इस खंड पर चर्चा के दौरान
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किसी को और संशोधन रखने की अनुमति देंगे?
माननीय उपाध्यक्ष : मैं जो समझता हूँ वह सामान्यतः एक अत्यन्त ही कठिन
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काम है। बाद में यदि संशोधनों को रखने की अनुमति दी गई तो यह असुविधाजनक है क्योंकि माननीय सदस्यों को एक बार फिर दिमाग पर जोर डालना पड़ेगा और....
पंडित मालवीय : किंतु विशेष परिस्थतियों की दृष्टि से वह अभी भी है।
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माननीय उपाध्यक्ष : निःसंदेह, चर्चा के दौरान, सहमति बनाने या इसी तरह के
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