हिंदू संहिता : जारी - Page 223

208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रखने की अनुमति दी है। कल मैं सुविधा की दृष्टि से इनका विषयवार समूह बनाने का प्रयास करूँगा। खंड और सभी संशोधनों तथा संशोधनों के संशोधनों पर चर्चा की जा सकती है।

श्री जे. आर. कपूर : आप कार्यालय को आज तथा पहले के अवसरों पर पेश किए गए सभी संशोधनों की समेकित सूची हम लोगों में वितरित कराने का निदेश दे सकते हैं। जिससे तत्काल उदाहरण के लिए हमारे पास सभी संशोधनों के सरल रूप होंगे।

माननीय उपाध्यक्ष : चूँकि संशोधनों की कई सूची हैं, इसलिए उन्हें सिलसिलेवार ढंग से रख दिया गया है और, इसलिए, फिर से इसे क्रमबद्ध करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आज पेश किए गए संशोधनों को वितरित कराने के संबंध में मैंने सोचा कि माननीय सदस्यों ने उन्हें लिख लिया होगा जैसा कि मैंने किया है।

डॉ. अम्बेडकर : मैंने भी उन्हें लिख लिया है।

श्री जे. आर. कपूर : खंड के एक ही भाग के लिए संशोधन अलग-अलग स्थानों पर हो सकते हैं और सुविधा की दृष्टि से उन्हें एक स्थान पर रखना ज्यादा अच्छा है।

माननीय उपाध्यक्ष : मैं कार्यालय को संशोधनों को एक बार फिर से दोहराने की बजाए संशोधनों की नम्बरां की सूची वितरित करने को कहूँगा।

श्री जे. आर. कपूर : इसे एक उपखंड वार होना चाहिए।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य अपने घरों से काफी दूर यहाँ संसदीय कार्य के लिए आए हैं। मैं यह नहीं मानता कि कार्यालय को यह करना चाहिए। माननीय सदस्यों का एक दृष्टिकोण हो सकता है तथा कार्यालय का भिन्न दृष्टिकोण और क्या माननीय सदस्य यह भी चाहते हैं कि इस विषय में उनके वास्ते सचिव भी बोले?

पंडित मालवीय के संशोधन के संबंध में मैं इसी अपवाद के रूप में अनुमति प्रदान करूँगा।

अन्य मामलों के संबंध में कल से मैं इस बात पर बतौर नियम जोर दूँगा कि मेरे और विधि मंत्री के पास संशोधन की एक प्रति अवश्य रहनी चाहिए।

आज संभवतः माननीय सदस्यों के पास उनके संशोधनों के बारे में विचार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं रहा हो (पंडित मालवीय अपने संशोधन को पढ़ सकते हैं जिससे कि हम इसे लिख सकें।)।