212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अब मैं उन सज्जनों को अधिमानता दूँगा जिन्होंने सबसे अधिक संख्या में संशोधन पेश किए हैं और आगे उसी क्रम में, और अंततः उन्हें जिन्होंने बिल्कुल ही कोई संशोधन पेश नहीं किया है और जो बोलना चाहते हैं। जो माननीय सदस्य पहले ही बोल चुके हैं उन्हें भी यदि आवश्यक हुआ, तो बोलने का मौका दिया जाएगा।
श्री राजगोपालाचारी : क्या मैं एक सुझाव दे सकता हूँ? जो यह वचन देते हैं और जिन्होंने यह विश्वास दिया है कि वे संक्षिप्त भाषण करेंगे, उनको अधिमानता दिया जाना चाहिए। माननीय सदस्यगण : नहीं, नहीं।
श्री राजगोपालाचारी : और वे बाद में दूसरों को अवसर दे सकते हैं। यदि कोई सदस्य लम्बा भाषण देना चाहता है, दूसरे सदस्य के द्वारा संक्षिप्त कर दिया जाता है तो हमें उसका समर्थन करने की जरूरत नहीं होगी, किंतु यह होगा कि जो पाँच मिनट के लिए बोलना चाहते हैं उनके भाषण को लम्बे भाषणों से काट दिया जाए।
माननीय उपाध्यक्ष : जो सुझाव दिया गया है वह निश्चित तौर पर अच्छा है। लेकिन मैं एक कठिनाई महसूस करता हूँ। किसी खास विधेयक पर सामान्य चर्चा के संकल्पों के विषय में, मैं सामान्यतः उनको अधिमानता दे सकता हूँ जो संक्षिप्त समय के लिए बोलना चाहते हैं जिससे कि इस पर अधिक से अधिक सदस्य बोल सकें। किंतु संशोधनों के संबंध में, उन माननीय सदस्यों ने जिन्होंने बिल्कुल ही कोई संशोधन पेश नहीं किया है सभा के समय पर कब्जा कर सकते हैं।
श्री राजगोपालाचारी : अन्य विचारों के पूर्वाग्रह के बिना मैं यह सुझाव दे रहा हूँ। क्योंकि किसी भी समय बिना विवाद के मतदान द्वारा निर्णय हो सकता है और जिन्हें कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण तथा संक्षेप में कहना वे रह जाएंगे।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : हम पहले ही यह कैसे जान सकते हैं कि कोई सदस्य लम्बा भाषण देंगे या संक्षिप्त?
श्री राजगोपालाचारी : यह दीर्घ और संक्षिप्त की लड़ाई है।
माननीय उपाध्यक्ष : हमारे पास केवल एक साधारण सूचक होगा कि सभी सदस्य यथासंभव संक्षिप्त भाषण करेंगे।
ख़्वाजा इनायतउल्ला : मैं पिछले सत्र में रखे गए कुछ संशोधनों का विरोध करना चाहता हूँ।
माननीय उपाध्यक्ष : उन्हें कोई भी नहीं रोकता है।