हिंदू संहिता : जारी - Page 232

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मैं इस बात को नहीं मानता कि संसद को समाज सुधारों से संबंधित विषयों से निपटाने का कोई अधिकार नहीं है। मैं अपने प्राचीन ग्रंथों - वेदों, स्मृतियों और श्रुतियों की पवित्रता के बारे में जानता हूँ। किंतु ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यन्त प्राचीनकाल में मूल विधि निर्माताओं द्वारा प्रतिपादित महान् सिद्धांतों की व्याख्या करने के लिए टीकाकार होते थे। धीरे-धीरे ये टीकाकार भी समाप्त हो गए और पिछले 150 वर्षों में हमने जो देखा है वह यह है कि समाज सुधार को प्रभावित करने वाले कई मामलों में न्यायाधीश जिसमें दूर लंदन में बैठे यूरोपीय न्यायाधीश भी सम्मिलित हैं और विधायकों ने समय-समय पर आगे बढ़कर देश की सामाजिक संरचना में परिवर्तन किया है। अतएव यदि हममें से कोई भी यह कहता है कि संसद को ऐसा विधेयक पारित करने का अधिकार नहीं होना चाहिए जो मौजूदा कानून के अंतर्गत देश के लोगों द्वारा उपभोग की जा रही अधिकारों और विशेषाधिकारों में हस्तक्षेप करता है, तो आज बीत चुकी बात है।

पंडित मित्रा : फिलहाल वर्तमान में गठित संसद यह वह संसद नहीं है।

डॉ. एस. पी. मुखर्जी : जहाँ तक इस संसद के अधिकार का प्रश्न है अत्यंत नाजुक मसला है। मेरे लिए इस निकाय का सदस्य होने के नाते इसके क्षेत्राधिकार को चुनौती देना मेरे लिए विशेष कठिन है, किंतु, जहाँ तक जनता की इच्छा को रखने का इसका अधिकार है, वह ऐसा विषय है जिस पर अगले कुछ महीनों में फैसला हो जाएगा और जनता स्वयं ही अपना निर्णय दे देगी। विपक्ष में बैठे हुए या पक्ष में बैठे हुए सरकार के सदस्यों दोनों के लिए इस संसदीय बातों के लिए दावा करना निरर्थक होगा जिसे वस्तुतः ईमानदारी से और विधिपूर्वक इस निकाय के लिए दावा नहीं किया जा सकता है। किंतु मेरा मुद्दा यह है कि आज विचारों की भरमार है - इस विधेयक के कुछ या कई मौलिक विशेषताओं के विरुद्ध भारी जनमत है। मैं इस विधेयक का समर्थन कर रहे माननीय सदस्यों से इन आलोचनाओं की गहराई को समझने का अनुरोध करता हूँ। इस विधेयक में कुछ विशेषताएँ हो सकती हैं जिससे मैं सहमत हूँ, किंतु मैं इस विधान को उनके दृष्टिकोण से देख रहा हूँ जिन्होंने या तो पूरे तौर पर या आंशिक तौर पर इसका विरोध किया है। जिस तरह से हम उनकी भावनाओं की गहराइयां समझ रहे हैं जो इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, ठीक उसी तरह से उनकी भावनाओं की गहराइयों को भी समझा जाना चाहिए जो इसका विरोध कर रहे हैं। समाधान कैसे ढूँढ़ा जाए? समाचार-पत्रों से हमें पता चला कि कूटनीतिक कारणों से इस विधेयक के कुछ भागों पर विचार नहीं करने का निर्णय किया गया है।

डॉ. अम्बेडकर : राजनीतिक कारणों से?