218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : ऐसा मालूम पड़ता है कि किसी प्रकार का टॉस किया गया है। एक ओर विवाह और तलाक है तो दूसरी ओर संपत्ति है तथा किसी तरह से विवाह और तलाक की जीत हुई है एवं कुछ समय के लिए संपत्ति नेपथ्य में चली गई है।
एक माननीय सदस्य : सपत्ति भी जीती है।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : सभा के सम्मुख खंड-2 के अन्तर्गत संशोधन पर जो बहस चल रही है, क्या हम लोगों के लिए किसी प्रक्रिया की युक्ति निकालना संभव है जिसके द्वारा इसे उन लोगों पर छोड़ दिया जाए जो इस संहिता के दायरे में आना और इसके प्रावधानों का पूरी तरह से लाभ उठाना चाहते हैं और साथ ही उनको भी मौजूदा हिंदू विधि द्वारा शासित होते रहने की छूट दे दी जाए तो इन प्रावधानों की पवित्रता या वैधता या न्याय में विश्वास नहीं करते हैं।
श्री भारती : यह एकरूपता है।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : वह एक प्रस्ताव है जिसे मैं आपके आदेश पर सभा के सम्मुख विचारार्थ प्रस्तुत किए गए विभिन्न संशोधनों के आधार पर बिल्कुल संगत तरीके से रख रहा हूँ।
मेरे कुछ मित्रों ने मुझसे कहा कि हम विदेशों में अपने पिछड़ेपन के लिए आलोचना के कारण बनेंगे। पिछले कुछ दिनों से मुझे यह कहा जा रहा है कि कुछ लोग आए और उन्होंने यह कहा कि चीन में वे लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं कि हिंदू संहिता विधेयक कब पारित होगा।
पंडित मित्रा : होनोलुलु में भी।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : ऐसा समझा जाता है कि अमेरिका में भी कुछ लोग भारतीय जनता के प्रगतिशील स्वभाव पर हिंदू संहिता की बाबत उनकी मनोवृत्ति के संबंध में ध्यान रख रहे हैं।
श्री गाडगिल : पुराने ऋषि स्वर्ग से भी देख रहे हैं?
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : उसे मैं बिल्कुल ही असंगत चर्चा मानता हूँ। हम अमेरिकी कानूनों को देखें। मैं अमेरिकी कानूनों की बाबत कुछ जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहा था। मैं यह पाता हूँ कि अमेरिका के 26 अलग-अलग राज्यों में वे अमरीकियों और नीग्रों के विचार को मँजूरी नहीं देते हैं और वे यह बताने के लिए इस सीमा तक जाते हैं कि अफ्रीकी रक्त का एक कतरा भी अमेरिकी और नीग्रो के बीच विवाह को नकार देगा कुछ राज्यों में अमेरिकी और चीनी के बीच या अमेरिकी