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और मंगोलियन के बीच विवाह निषिद्ध है। व्यावहारिक तौर पर सभी राज्यों में विवाह संबंधी अलग-अलग कानून हैं। किसी ने अभी-अभी हस्तक्षेप किया था। एकरूपता का क्या होगा? मैं समझता हूँ कि संयुक्त राज्य अमेरिका की जनता सभी विवाह संबंधी कानूनों की पूरी एकरूपता होने के बावजूद अत्यन्त खुशी और सुख के साथ गुजारा कर रही है। अतएव एकरूपता इस विषय पर अंतिम शब्द नहीं है। एकरूपता से ठहराव, जीवनहीनता का पता चलता है। श्रीमती रेणुका राय : खड़ी हुईं।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : ....और मैं समझता हूँ कि श्रीमती रेणुका राय भी उस स्थिति तक नहीं पहुंची हैं।
श्रीमती रेणुका राय : क्या हमें अमेरिका का अनुसरण करना चाहिए?
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : मैं नहीं कह रहा हूँ कि आपको अमेरिका का अनुसरण करना चाहिए। मैं तो यह सुझाव दूँगा कि हमें उसी राह पर चलना चाहिए जो हमारे देश के द्वारा दिखाया गया है और श्रीमती राय को भी उसी मार्ग का अनुसरण करना चाहिए और उन्होंने अभी तक उसका अनुसरण नहीं किया है।
अमेरिका के बारे में भी ऐसा ही है। अब पुनः रोमन कैथोलिकों की बात लीजिए। उनके कठोर कानून के द्वारा, उनके धर्म के अनुसार तलाक की अनुमति नहीं है। किंतु लगभग सभी देशों में उन्होंने नागरिक कानून पारित किए हैं जो आवश्यक होने पर रोमन कैथोलिकों को तलाक लेने की अनुमति देती है। किंतु उन्होंने अपने धर्म को नहीं छुआ है। उन्होंने उसे अलग रहने दिया है, लेकिन उन रोमन कैथोलिकों को जो नागरिक कानूनों के अनुरूप शासित होना चाहते हैं उन्हें ऐसा करने की स्वतंत्रता है। बहुत खूब, डॉ. अम्बेडकर सिर हिला रहे हैं। यह जानना कठिन है कि यह स्वीकारोक्ति है या वे नकार रहे हैं। किसी भी स्थिति में, वह बाद में स्पष्ट कर सकते हैं - मैं सुधार के लिए तैयार हूँ। इन कानूनों को प्राप्त करना अत्यन्त कठिन है। किंतु संसदीय ग्रन्थालय में जो भी ग्रन्थ उपलब्ध हैं मैं उन्हें गौर से देखने का प्रयास कर रहा था और मैं पाता हूँ कि दो पद्धतियों में स्पष्ट भेद किया गया है।
अब हम लोग अपने आपको अभी के लिए विवाह और तलाक तक सीमित रखेंगे। यह क्या है इसकी चिन्ता देश के तथाकथित प्रतिवादियों जिसमें प्रगतिवादी महिलाएँ भी हैं, को सता रही है?
श्री कामथ : सदन में या सदन के बाहर?
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : उन्हें चिन्ता है कि तलाक और एक विवाह प्रथा के लिए