222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की रक्षा की उसकी प्रशंसा की है। मैं एक पल के लिए भी यह नहीं बोल रहा हूँ कि हिंदू समाज के साथ सब-कुछ ठीक है। मैं जानता हूँ कि गड़बड़ी कहाँ है। किंतु यह कुछ विस्मयकारी है, कुछ अपूर्व है कि हमारा धर्म या महान् सच्चाइयाँ जिस पर हिंदू कई पीढि़यों से आगे बढ़ते रहे हजारों वर्षों तक उस पर जीवित रहे, किसी न किसी प्रकार से अनुकूलनीयता और जीवन शक्ति प्रदर्शित की है अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलती है। क्या कारण है? कारण यह है कि जो भी सच्चाइयाँ प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा प्रतिपादित की गईं, या उनके बाद जिन्होंने इस पर टीका की। वे चरित्र से हठधर्मी नहीं थे। जिस तरह से समाज की आवश्यकताएँ बदल गईं उसी तरह से नियम भी बदल गए। भारत जैसे विशालकाय देश में जो आज राजनीतिक दृष्टि से एक है - निःसंदेह हम लोग इसे राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में बढ़ता हुआ देखना पसंद करेंगे। ठीक उसी समय हम यह भी नहीं भूल सकते कि इस देश में हजारों-हजार लोग विभिन्न भागों शहरों में और गाँवों में निवास करते हैं। इनमें शिक्षित और अशिक्षित तथा दूर -दृष्टि वाले और बिना दृष्टिवाले लोग भी हैं जिन्होंने व्यक्तिगत और सामाजिक प्रगति और कल्याण से मेल खाने वाली अपनी ही संरचना बना ली है। किसी प्रकार उस समाज ने विकास कर लिया है। आप इस विश्व के किसी भी दूसरे देश में ऐसा पाते हैं जहाँ गंभीर घातों-प्रतिघातों के बावजूद भी सामाजिक संरचना एक रही हो?
भारत में सात सौ वर्षो तक मुस्लिम शासन रहा है। अब उस अवधि के दौरान कई सिद्धांत प्रतिपादित किए गए जो आज के संदर्भ में रूढि़वादी प्रतीत हो सकते हैं। किंतु वे आदेश समाज को उसी रूप में बनाए रखने और उसे सुदृढ़ करने के विचार से दिए गए थे वह इस प्रकार कि उन खास सिद्धांतों का प्रतिपादन उन विद्व ानों ने किया था जो उन विषयों पर किसी भी परिस्थिति में आज इस संसद में बैठे हम लोगों में से किसी से भी कम योग्य नहीं थे।
इस देश में समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं। ब्रह्म समाज से लेकर आर्य समाज तक का उल्लेख किया जा चुका है। जैसे ही यह प्रतीत हुआ कि समाज गतिहीन हो रहा था, रूढि़वादी बन रहा था तब इस भूमि पर कुछ विलक्षण व्यक्तियों ने अपना मस्तक उठाया और भारतीय चयन के उद्गम महत्वपूर्ण स्रोतों वेदों या उपनिषदों को एकत्रित किया तथा उनकी अपनी व्याख्या दी और इसके द्वारा रूढि़वादिता की बुराइयों को पनपने से रोकने तथा समय के नैतिक क्षण को रोकने का प्रयास किया। लेकिन आज क्या हुआ है? इस देश में जिस विचारधारा को लेकर ब्रह्म समाज लगभग सौ वर्ष पूर्व खड़ा हुआ था उसे हिंदू समाज जिसे या आप आज हिंदू समाज