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कहते हैं के द्वारा व्यावहारिक तौर पर समाप्त किया जा चुका है।
एक अन्य दिन हम बौद्ध धर्म के बारे में चर्चा कर रहे थे। यह एक ऐसा जिस पर डॉ. अम्बेडकर स्वाभाविक रूप से सर्वश्रेष्ठ आधिकारिक वक्ता होंगे क्योंकि उन्होंने हाल ही में इस धर्म में दीक्षा ली है। किंतु जो भी हो विदेशों से कुछ मित्र आए, मेरा महाबोधि सोसाइटी से कुछ संबंध है। मैं इसका अध्यक्ष हूँ। (एक माननीय सदस्य - क्या आप बौद्ध हैं?) बिना बौद्ध होते हुए भी मैं एक हिंदू हूँ और फिर भी मैं इसका अध्यक्ष हूँ, क्योंकि बौद्ध धर्म की महानता को स्वीकार करने के लिए पर्याप्त उदार हूँ और फिर भी हिंदू बना हुआ हूँ। मैं जिस विषय को उठाने ही वाला था वह यह था। विदेशों से कुछ मित्र आए थे और उन्होंने शिकायत के लहजे में पूछा, ‘‘ठीक है, भारत बुद्ध की जन्म भूमि था किंतु भारत ने बौद्धवाद की हत्या कर दी।’’ मैं अभी उन विवाहित विषयों में नहीं जाना चाहता हूँ। लेकिन एक मुद्दा मुख्य रूप से उभर कर आता है और वह यह है कि जब बुद्ध ने अपने महान् सिद्धांतों की शिक्षा देना आरम्भ किया तो उस समय भारत को बुद्ध की जरूरत न केवल विश्व को बचाने के लिए अपितु भारत को भी बचाने के लिए थी। और बुद्ध उन कतिपय प्रवृत्तियों की वृद्धि को रोकने में सफल हुए जो हिंदू सभ्यता के जीवन-रक्त को ही नष्ट कर देते। उन्हीं हिंदुओं ने बुद्ध को अवतार के रूप में आत्मसात् कर लिया। यद्यपि भारत में वे लोग भी थे जिन्होंने बौद्ध धर्म से लड़ाई की - वे ठीक थे या गलत एवं ऐसा विषय है जिसमें मुझे अभी जाने की आवश्यकता नहीं है - किंतु धीरे-धीरे यह स्वीकार कर लिया गया था कि बौद्ध धर्म भी भारतीय भूमि पर रहेगा और विकास करेगा और इसे भारतीय संस्कृति में आत्मसात् करना पड़ा था।
श्री गाडगिल : संहिता के साथ भी यही बात होगी।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : इससे परे है। वह एक स्वर्ग है जो मेरे मित्र बना रहे है,
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जिसमें वह हमेशा के लिए रह सकते हैं।
जहाँ तक बौद्ध धर्म का प्रश्न है यह बढ़ता रहा और दूसरे देशों में भी इसका प्रसार हो गया किंतु बौद्ध धर्म के सिद्धांत धीरे-धीरे हिंदू विचारधारा में घुलमिल गए। मेरे यह सब कुछ कहते रहने का कारण यह दिखाना है कि हमें किसी भी ओर से और विशेषकर विदेशों की ओर से किसी भी आलोचना को, जब वे कहते हैं कि हिंदू सभ्यता या हिंदू संस्कृति जड़ या गतिहीन या क्षरणशील स्वभाव की रही है कभी भी बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। हमारी संस्कृति और सभ्यता में कुछ है जो गतिमान प्रकृति का है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवन्त रहा है। उस समय भी जब भारत एक गुलाम राष्ट्र था, इस देश में लोगों का जन्म हुआ, हमारी धरती के लोग, जो महान