हिंदू संहिता : जारी - Page 239

224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

आदर्शों की हिमायत करते रहे जिसने हिंदू सभ्यता के शाश्वत सिद्धांतों को नए और आधुनिक परिस्थितियों में भी नव-जीवन प्रदान किया। यह संहिता उस उद्गम-स्रोत को नष्ट कर रही है। मैं खंड-4 के परिणामों को सोच कर कांप उठता हूँ। आप हिंदू संहिता का खंड-1 पढि़ए, आप वहां दरवाजा बंद कर रहे हैं। आप कह रहे हैं कि वैसे रिवाजों या प्रथाओं को छोड़कर जिसे इस संहिता के निकाय में स्वीकार किया गया हो, बाकी सब कुछ आज से निषेध होगा। और मेरे मित्र गाडगिल कहते हैं कि यह आधुनिक बुद्ध या मनु या उसी प्रकार किसी की दूसरी संहिता होगी। (एक माननीय सदस्य : क्या गिरावट है!) प्राचीन विचारधाराओं पर आधारित यह रीतियां और प्रथाएँ हैं जिन्होंने समय-समय पर हिंदू समाज को बढ़ने और समृद्ध होने दिया है। 12 बजे मध्याह्न

आज यह महान सभा - और हममें से सभी माननीय तथा विद्वान व्यक्ति हैं - सत्यनिष्ठा से निर्णय कर रहे है कि हम भारतीय धर्म और भारतीय संस्कृति के मूल स्रोत हैं और हम इस संहिता में जो कुछ भी सम्मिलित करने का निर्णय करेंगे वह इस समय के लिए अंतिम है और अन्य किसी भी बात की न्यायाधीशों तथा न्यायालयों द्वारा द्वारा जाँच-पड़ताल की अनुमति नहीं दी जाएगी। क्या सभा यह नहीं जानती है कि 1951 में भी स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमारे अपने उच्चतम न्यायालय को उन केसों में जहां हिंदू कानून का प्रश्न विचाराधीन था मूल ग्रंथों या उनकी व्याख्याओं से लेना पड़ा और निर्णय सुनाना पड़ा क्योंकि न्यायिक निर्णयों या पाठ्य-पुस्तकों से वे सादृश्य केस नहीं पा सके थे? आज आप अपने धर्म के मूल स्रोत की हत्या कर रहे हैं जिसने लोगों की पीढि़यों को अपने आपको जीवन वास्तविकता बनाने हेतु ऐसा विस्तृत दायरा प्रदान किया था और आप कहते हैं कि यह एक अग्रगामी विधान है। यह एक फिसड्डी विधान है; यह एक ऐसा विधान है जिससे किसी को भी बिल्कुल मदद नहीं मिलती है; यह केवल देश को विभाजित करने में मदद करता है। मैं अपने किसी अभिप्राय को किसी पर भी थोपना नहीं चाहता हूँ। संभव है कोई भी जो इसका समर्थन करता है या इसका प्रस्ताव करता है वह श्रेष्ठ अभिप्रायों से ऐसा कर रहा हो। मैं इसे मानने के लिए तैयार हूँ किन्तु मैं जो कहना चाहूँगा वह यह है सभी लोगों के संबंध में इसके प्रावधानों को अनिवार्य नहीं बनाइये। (एक माननीय सदस्य : अनिवार्य कहाँ है?) तलाक अनिवार्य नहीं है किंतु हिंदू विवाह के पवित्र बन्धन को तोड़ना अनिवार्य होगा और वह बिल्कुल खराब है। क्या तलाक आता है या नहीं यह बिल्कुल ही अलग प्रश्न है; आप प्रथाओं और दृढ़ विश्वासों को हिंसक तरीके से बदल रहे हैं। किसी ने कहा, जब मैं पहले बोल रहा था कि