हिंदू संहिता : जारी - Page 240

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दक्षिण भारत विशेष रूप से प्रगामी है और कई कानूनों जिस पर हम विचार कर रहे हैं वहाँ पहले से ही विद्यमान है। मैं दक्षिण भारत के लिए अच्छे भविष्य की कामना करता हूँ। दक्षिण भारत को प्रगति से प्रगति की ओर और तलाक से तलाक की ओर बढ़ने दीजिए। मुझे दक्षिण भारत से बिल्कुल कोई लड़ाई नहीं है, लेकिन जो इसे नहीं चाहते हैं उन पर यह जबरदस्ती क्यों थोपा जा रहा है। वास्तव में मेरे पास एक पत्र है। मुझे ये दो दिन पहले ही मिला है - यह एक पोस्टकार्ड पर लिखा गया है और मैं नहीं जानता कि किस महानुभाव ने इसे लिखा है।

श्री गाडगिल : पुनः प्रेषण केन्द्र से?

डॉ. एस. पी. मुखर्जी : यह पुनःप्रेषण केन्द्र से नहीं आया है। मैं इसे श्री गाडगिल को, यदि वह पसंद करते हैं, उपहार के बतौर दे सकता हूँ। यह एक अप्रचलित विधि नहीं है। इससे सिर्फ यही पता चलता है कि इस देश में प्रथाएं कैसे अलग-अलग हैं। यहाँ यह मानुभाव हैं जो नुजविड़ जिला किस्तना से लिखते हैं-

‘‘हिंदू विधि के संबंध में प्रकाशित इस विधेयक में एक प्रावधान है जो एक लड़की और उसके मामा के बीच संपन्न हुए विवाह को निष्प्रभावी कर देता है क्योंकि यह निषिद्ध किया गया है। उपर्युक्त प्रथा आन्ध्रप्रदेश और तमिलनाडु में अत्यधिक अत्यधिक प्रचलित है और यहाँ तक कि ब्राह्मण लड़की के मामा को अपनी लड़की के सर्वथा योग्य और उपयुक्त वर मानते हैं। संभवतः कानूनविदों और दूसरों को इस निषेध के बारे में पता नहीं है। मुझे विश्वास है कि हम लोगों में से अधिकांश को इसका ज्ञान नहीं है, और उस स्थिति में इस प्रावधान के अज्ञानता वश सम्पन्न किए गए विवाह अत्यन्त कठिनाई में रहेंगे। अतएव मैं आपसे एक संशोधन रखने का अनुरोध करता हूँ....’’

मैं नहीं जानता कि उन्होंने खास कर मुझे ही क्यों चुना और डॉ. अम्बेडकर को क्यों नहीं लिखा -

‘‘....प्रतिषेध से इस प्रथा को बचाना या विवाह के अध्याय से पहले अतिक्रम हेतु पर्याप्त समय का निर्धारण करना, को प्रवर्तित किया जा सकता है।’’

यह केवल इस प्रसंग में उन लोगों के लिए है जो उन क्षेत्रों में रह रहे लोगों के प्रगामी स्वभाव के बारे में बात कर रहे थे। स्वाभाविक है वे काफी आगे निकल चुके हैं। (एक माननीय सदस्य : क्या यह सत्य है?) मैं नहीं जानता कि क्या यह चिट्ठी पुनःप्रेषण केन्द्र से आई है। किंतु दक्षिण भारत के मेरे मित्र मुझे बता सकते हैं कि क्या यह वास्तविक है (व्यवधान मैं अपने उत्तर में लेखक को श्री भारती के पास भेजता हूँ। जो मुद्दा मैं बढ़ा रहा हूँ वह यह है।)