खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 24

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होगा। क्योंकि तब सदन के सामने के विभिन्न अनुबंधों, अनुच्छेदों का स्पष्ट चित्र होगा। यही तरीका सबसे अच्छा है। और हम खंड-2 पर आगे बढ़ें।

जहाँ तक पंडित एम. बी. भार्गव का संशोधन है उसमें अधिकतर खंड-1 के संशोधन की बात की है और वे विधेयक के अनुबंध अनुच्छेदों के उपयोग पर कुछ नए प्रतिबंध लगाना चाहते हैं।

डॉ. अम्बेडकर : वास्तव में खंड-1 में संशोधन ही है।

पंडित एम. बी. भार्गव : मुझे स्पष्ट करने की अनुमति दी जाए।

माननीय अध्यक्ष : संशोधन में कहा गया है :-

‘‘यह संहिता या उसके ऐसे हिस्से तभी लागू होंगे जब वे संसद के चुने हुए अधिकतर हिंदू द्वारा जनमत के आधार पर ही संशोधित किए जाएं।’’

यह वास्तव में खंड-1 के उपखंड (3) के बारे में कहा गया है, यद्यपि यह एक नए खंड के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस पर आगे बहस करना आवश्यक नहीं है और अब मैं खंड-2 पर आगे बढूँगा।

श्री सरवटे (मध्य भारत) : आधिकारिक संशोधन पहले लिया जाएगा या मेरा?

माननीय अध्यक्ष : जहाँ तक विधेयक का संबंध है हम क्रम से चलेंगे। आधिकारिक संशोधन बाद में होगा।

श्रीमती दुर्गा देवी : अगर अधिकारिक संशोधन पहले ले लिया जाए तो अनाधिकारिक संशोधनों के बहुत से मसले जो बाद में आएंगे अपने आप तय हो जाएंगे।

माननीय अध्यक्ष : हम क्रम से चलेंगे।

डॉ. अम्बेडकर : समय की बचत के लिए क्या मैं एक सुझाव दे सकता हूँ?

श्री त्यागी : विधेयक को वापस ले लें। यही समय का सबसे अच्छा उपयोग होगा।

डॉ. अम्बेडकर : यह तो सबसे अच्छी आर्थिक बचत होगी। अगर आप आदेश पत्र में दिए गए विभिन्न संशोधन देखें तो पाएंगे कि अधिकतर संशोधन केवल एक-दूसरे में फेर बदल ही होंगे।

कोई भी संशोधन ठोस रूप से दूसरे संशोधनों से अलग नहीं है। इसी से मेरा यह सुझाव था कि क्या यह ठीक तरीका नहीं होगा कि सभी सदस्यों को अपने-अपने