खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 25

10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संशोधन प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी जाए और उसके बाद आम चर्चा हो, बजाय इसके कि एक-एक संशोधन प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए और उस पर बहस हो, उसका निपटारा किया जाए। ऐसे ही एक के बाद दूसरे संशोधनों को प्रस्तुत किया जाए उन पर बहस हो और निपटान किया जाए। मेरे विचार से समय की बचत के हित के लिए मेरा सुझाव आपको ठीक लगेगा।

अध्यक्ष महोदय : वास्तव में हम यही तरीका अपना रहे हैं। एक ही मसले के सभी संशोधन एक साथ प्रस्तुत किए जाएं और उन पर एक साथ बहस हो। हमारी पहले भी यही प्रक्रिया रही है और इसलिए यही प्रक्रिया यहाँ भी लागू होगी।

श्री सरवटे : मैं कहना चाहूँगा :

(1) खंड-2 में प्रतिस्थापन हेतु ‘‘2. संहिता का प्रयोग, (2) यह संहिता सभी हिंदुओं पर लागू होगी।

(2) संहिता में हिंदू की परिभाषा जब तक कि दूसरा कुछ न दिया हो, अर्थ परिभाषा भारत का नागरिक होगा।

(3) अधिनियम की परिभाषा के अनुसार यह संहिता केवल हिंदुओं पर लागू होगी और जो विवाह इस संहिता के लागू होने से पहले इस अधिनियम के अंतर्गत नहीं हुए विशेष विवाह अधिनियम, 1872 (1872 का III ) में भी उसके बारे में कुछ नहीं दिया गया हो)।’’

माननीय अध्यक्ष : क्या मैं एक सुझाव और दे सकता हूँ? वे संशोधन जो छपे हैं और दूसरे भी जो वितरित किए गए हैं। इसलिए माननीय सदस्य केवल उन्हीं संशोधनों का जिक्र करे जो वे प्रस्तुत करना चाहते हैं और मैं चाहूँगा कि वे प्रस्तुत हों। एक ही खंड और विषय से सम्बन्धित सभी संशोधन प्रस्तुत किए जाएंगे और उन पर चर्चा होगी।

श्री त्यागी : जिन संशोधनों में संशोधन किया जाना है, उन मुद्दों पर अलग से चर्चा होगी। माननीय अध्यक्ष : हाँ।

परिवहन एवं रेल राज्यमंत्री (श्री संथानम्) : महोदय, क्या हिंदू संहिता के आधारभूत

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तथ्यों के विरुद्ध जाने की अनुमति है। संशोधन में संहिता को सभी ईसाईयों, मुसलमानों और दूसरों पर भी लागू करने के लिए कहा गया है। क्या यह संहिता के बाहर का मामला नहीं होगा? महोदय, मैं इस विषय में आपसे नियम जानना चाहता हूँ।