हिंदू संहिता : जारी - Page 241

226 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री जे. आर. कपूर : यह प्रगतिवादी राज्य नहीं है।

डॉ. एस. पी. मुखर्जी : जो उनका अनुसरण कर सकते हैं इसे बिल्कुल प्रगतिवादी मान सकते हैं। मैं किसी भी राज्य की बुद्धिमत्ता या बुद्धिहीनता को चुनौती नहीं दे रहा हूँ। इस विशाल देश में लाखों, करोड़ों लोगों के द्वारा इसका अनुसरण किया जा सकता था। स्वाभाविक रूप से प्रथाओं का विकास खास तरीके से हुआ होगा। मेरा प्रस्ताव इस नतीजे पर पहुँचता है। आप इस संहिता को सभी पर प्रयोजन मत बनाइये - मैं इस समय विवाह और तलाक की बात कर रहा हूँ - किंतु यह घोषणा उन पर छोड़ दीजिए जो जिनका भविष्य में विवाह होगा कि वे इन प्रावधानों द्वारा और न कि धार्मिक विवाह के उत्तरफल के द्वारा शासति होना पसंद करेंगे; आप उन्हें ऐसा करने की स्वतंत्रता दीजिए। (एक माननीय सदस्य : पिछले विवाहों का क्या है?) इसके दायरे में उनके मामले आते हैं जो भविष्य में आता है। हम लोग विधायन नहीं कर रहे हैं। संसद के वर्तमान सदस्यों के विवाह-विच्छेद में सहायता देने के उद्देश्य से मैं मान लेता हूँ। हम लोग भविष्य की ओर देख रहे हैं; हम लोग भावी पीढ़ी को कुछ देने की सोच रहे हैं जिससे कि वे शांति से तथा अधिक आराम से रह सकें। किंतु प्रतीत होता है कि आप इसे उन पर लागू करना चाहते हैं जो पहले से ही विवाहित हैं....

डॉ. अम्बेडकर : जो पहले से ही विवाहित हैं उन पर यह प्रयोज्य नहीं है।

डॉ. एस. पी. मुखर्जी : आप वहाँ भी प्रावधान कर सकते हैं। मान लीजिए आप इसे उन सभी पर लागू करना चाहते हैं जो पहले से ही विवाहित हैं तो मैं आपको इसका समाधान दूँगा। आप इसे व्यक्ति पर छोड़ दीजिए, और एक या दो वर्षों के अंदर उसे अपना निर्णय पंजीकृत कराने को कहिए कि क्या वह इस विकल्प को स्वीकार करते हुए इस संहिता के द्वारा शासित होना पसंद करेगा। यदि आप यह भाषा प्रयोग कर सकते हैं। (एक माननीय सदस्य : प्रत्येक जगह क्यों नहीं?) ठीक है, प्रत्येक जगह’ को मैं इसे धारणा से स्वीकृति नहीं दे रहा हूँ कि आप दूसरों के लिए कुछ ऐसा निर्णय कर रहे हैं जिसके लिए आज आपको कोई अधिकार नहीं है। आप एक ऐसा कानून पारित कर रहे हैं जिसके द्वारा आप कह रहे हैं कि बिना किसी सुधार या परिवर्तन के विवाह का धार्मिक स्वरूप अभी की तरह चलता रहेगा और दूसरे प्रकार के विवाह करने के लिए भी लोग स्वतंत्र हैं जो इसका लाभ उठाना चाहते हैं। लोगों को भविष्य में अपना विकल्प चुनने दीजिए। कोई बाध्यता नहीं है और मौजूदा लोगों को आप समय-सीमा दे सकते हैं या नहीं भी। आप कह सकते हैं कि यदि कोई खास पक्ष इस संहिता के प्रावधानों द्वारा शासित होना चाहता है, तो वैसे लोग पंजीयक या महापंजीयक या महानिदेशक या इसी तरह से किसी के