हिंदू संहिता : जारी - Page 242

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पास भी घोषणा कर सकते हैं और इस संहिता में प्रावधान किए गए राहत को पा सकता है। मैं आपसे पूरी गंभीरता से पूछता हूँ कि यह क्या है जो उसके द्वारा आप गँवा देंगे?

पंडित कुंजरू (उत्तर प्रदेश) : हमें उससे क्या लाभ होगा?

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डॉ. एस. पी. मुखर्जी : उससे आपको जो फायदा होगा वह यह है कि आप देश की एकता को नष्ट नहीं करेंगे।

पंडित कुंजरू : यह अधिनियम जब पारित होगा तो अनुज्ञात्मक होगा। यह किसी भी दम्पत्ति को तलाक के प्रावधानों का लाभ उठाने के लिए बाध्य नहीं करेगा। यह दम्पत्ति को सदैव यह करने की स्वतंत्रता होगी कि क्या वे उस प्रावधान द्वारा शासित होना चाहते हैं या नहीं।

डॉ. एस. पी. मुखर्जी : वह एक दृष्टिकोण है जिस पर कुछ जोर देकर अनुरोध किया जा सकता है। यहाँ मतभेद यह है - कि आप हिंदू विवाह, जिसे करोड़ों लोगों द्वारा पवित्र और सांस्कारिक माना जाता है, के चिरस्थायित्व को नष्ट कर दें। श्री कुंजरू और इस सभा में बैठे कई लोग इससे सहमत नहीं हो सकते हैं। मैं उन लोगों से झगड़ा नहीं कर रहा हूँ जो यह विश्वास करते हैं कि विवाह द्विपक्षीय समझौता है, कि यह सहज एक संविदा है; मुझे उनके विरुद्ध कुछ भी नहीं कहना है यदि कुछ लोग ऐसे हैं जो यह दृष्टिकोण रखते हैं। उन्हें यह दृष्टिकोण रखने दीजिए किंतु वैसे लोग भी हैं जिनका दृष्टिकोण इसके विपरीत है, जो वास्तव में और ईमानदारी से यह विश्वास करते हैं कि यह पद्धति जो हजारों वर्षों से प्रचलित रही है, पवित्र है और उनकी परम्परा तथा धर्म में इसकी जड़े गहरी हैं। आपको इस सभा में बैठने और यह कहने का क्या अधिकार है कि आप एक झटके में यह महान अधिकार को समाप्त कर देना चाहते हैं? पंडित कुंजरू के लिए मेरा यही उत्तर है। (श्री भारती ः एक विवाह प्रथा) मैं इस पर आ रहा हूँ। श्री भारती को चिन्तित होने की जरूरत नहीं है। मैं आशा करता हूँ कि तलाक के मामले में मुझसे सहमत ही रहे हैं और यही कारण है कि वह चाहते हैं कि मैं एक विवाह प्रथा पर बोलूँ। मेरा यही दृष्टिकोण है। मुझ पर विश्वास कीजिए, ठीक या गलत, इस हिंदू संहिता विधेयक पर यह देश बुरी तरह से बँटा हुआ है। मैं नहीं चाहता हूँ कि वैसा ही हो। मैं चाहता हूँ कि हम अपनी सामाजिक संरचना में प्रगति करते रहें तथा सुधार करते रहें। लेकिन हम यह इस प्रकार से करेंगे कि हम अधिसंख्यक लोगों को अपने साथ लेकर चल सकेंगे, इस सभा में उन्हें बलपूर्वक साथ लेकर नहीं चलें या उन्हें बाहर चतुर्दिक आंदोलन के सूत्र में न लेकर चलें, किंतु उनके तर्क और दृढ़विश्वास में अपील करके उन्हें अपने साथ लेकर चलें, जब मैंने कट्टरपंथी सम्प्रदाय के प्रतिनिधियों से इस विषय पर चर्चा की....