228 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : वह करपात्री जी हैं।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : नहीं, मैं उनसे हाल में नहीं मिला हूँ।
पंडित मित्रा : इसमें क्या नुकसान है यदि उन्होंने परामर्श किया है?
डॉ. अम्बेडकर : कोई हानि नहीं है। मैंने उन्हें आमंत्रित किया था और उन्होंने आने की इच्छा प्रकट की थी। बाद में उन्होंने आने से मना कर दिया। मैंने उनसे किनारा नहीं किया है।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : मैंने इस विषय पर हाल में करपात्री जी से चर्चा नहीं की है। इस विषय पर उनसे चर्चा करने में मुझे खेद नहीं होगा; किंतु मैंने चर्चा नहीं की है।
डॉ. अम्बेडकर : वास्तव में, मैंने उन्हें आने और चर्चा करने के लिए निमंत्रित किया था; किंतु वे नहीं आए।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : मैंने इस विषय पर कई लोगों से जो उनके दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं और दूसरों से जो कट्टरपंथी नहीं हैं से चर्चा की है। किसी न किसी प्रकार से आज देश विभाजित है। इस विषय पर कैसे बढ़ा जाए? जैसा कि मैंने कहा, यह प्रेस कानून नहीं है, कि कुछ खतरे में है और इसलिए आप किसी प्रकार से बढ़ें तथा प्रेस कानून को पारित कर दें और इसे कार्यान्वित करें। इस संविधान का संशोधन नहीं है। यह राजनीतिक मसला नहीं है। वास्तव में हम राजनीतिक मामलों पर मतभेद रख सकते हैं। किंतु हमारे महान देश में सुधार करने की आवश्यकता के संबंध में मूलभूत सहमति होनी चाहिए, जो कि हमारी सभ्यता को अधिक प्रगतिवादी और अधिक विकसित बनाएगा। इस पर हमारा दृष्टिकोण एक होना चाहिए। वे लोग जो विद्यमान प्रथाओं को मान रहे हैं, वे लोग जो विद्यमान कानूनों के प्रावधानों से बँधे हुए हैं प्रतिगामी नहीं हैं। दुर्भाग्य यह है कि इस विधेयक के कई समर्थक जो अपने तथाकथित प्रगति और विकास के भावावेग में बह गए हैं, अपने भावाभिभूतता में सोचते हैं कि जो वह सोचते हैं वह इस विषय पर ब्रह्म शब्द है, कि वे प्रगतिवाद के प्रतिनिधि हैं और दूसरे प्रतिगामी हैं। यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। (एक माननीय सदस्य : लिपिस्टिक)। मैं लिपिस्टिक के बारे में कतई बात नहीं कर रहा हूँ; मैंने प्रगति के संबंध में बात की है। हमें दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण एवं ऐसे व्यक्ति के दृष्टिकोण जो विद्यमान विचारधारा में विश्वास करता है, पर विचार करना चाहिए जब तक कि इसे समान में निरा सड़ा हुआ, अनैतिक और पिछड़ा हुआ न करार दिया जाए। यदि यह बताया जा सके। मैं डॉ. अम्बेडकर से और उनसे जो सुधार लाना चाहते हैं सहमत हूँ। किंतु यदि यह मात्र मतभिन्नता है, यह दृष्टिकोण की भिन्नता