हिंदू संहिता : जारी - Page 246

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का दावा करते हैं दूसरों को भी अपने लिए और अपने भविष्य के लिए ऐसा करने की स्वतंत्रता जरूर होनी चाहिए। वह एक शानदार शुरुआत होगी। इस संहिता का चाहे जितना भी अधिक विरोध हो, मैं यह मानने को तैयार हूँ कि डॉ. अम्बेडकर और उनके साथियों की तरफ से यह विलक्षण कार्य का नमूना है। मैं यह भी स्वीकार करने को तैयार हूँ कि यह अत्यधिक विवादित विषय है और उन्होंने पूरी योग्यता के साथ इस विषय का सूक्ष्म परीक्षण किया है। इसके लिए, यदि वह संसद से प्रदान किए जाने वाले मानद डिग्री को स्वीकार करने हेतु तैयार हैं तो हम डॉ. अम्बेडकर को डिग्री देने के लिए तैयार हैं। किंतु यदि आप इस पर एक विधान की दृष्टि से देखें जिसे करोड़ों हिंदुओं जिन्होंने इसका विरोध किया है उनके गले उतारना है। मैं कहता हूँ कि आप भारत की जनता की सेवा नहीं कर रहे होंगे। इस विलंबित चरण में भी सिर्फ एक ही रास्ता है जिस पर आप बढ़ सकते है और वह यह है। हमें आपस में नहीं लड़ना चाहिए; हमें इस मूलभूत मुद्दे पर मतभेद रखने को सहमत होना चाहिए। यदि आप यह बताने को तैयार हैं कि कतिपय मामले जो इसी क्षण समाज-विरोधी हैं, या हिंदू समाज की जीवन शक्ति को ही नष्ट कर रहे हैं। हमें ऐसे प्रावधानों को, यदि कोई हो, अनिवार्य बनाने पर सहमत होना चाहिए। अन्यथा, इस नए बृहत् संरचना, जिसे आपने तैयार किया है, को कुछ वर्षों के लिए रखिए और कहें कि कोई भी भले ही वह हिंदू हो या नहीं, कोई भी भारत का नागरिक, जो इसे स्वीकार करना चाहता है एक घोषणा कर सकता है, और विवाह या तलाक या संपत्ति से संबंधित प्रावधान, जो कुछ भी यह है, ऐसे चयनकर्त्ताओं पर प्रयोज्य होगा। यह एक महान युग का आरम्भ होगा। क्योंकि बहरहाल अंततः कौन निर्णय करने जा रहा है? आपके चुनाव आ रहे हैं। अतएव आप आगे बढ़ें। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा, उनकी आँधी आएगी और सभी विरोधियों को उड़ा ले जाएगी और....

श्री कामथ : बवंडर।

डॉ. एस. पी. मुखर्जी : जी हाँ, बवंडर आएगा।

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हिंदू संहिता विधेयक के प्रावधानों के संबंध में बवंडर आने दीजिए। उन्हें जनता के पास जाकर भरोसा दिलाने दीजिए और उन्हें बताइये कि वे इसे उन पर नहीं थोप रहे हैं। उन्हें कहने दीजिए, ‘‘हम आपको विकल्प देते हैं। यहाँ स्वर्ग है जिसे हमने बनाया है। इस स्वर्ग में आइये और मोक्ष की प्राप्ति कीजिए।’’ जाइये और जनता को समझाइये और यदि वे यह समझते हैं कि यह वास्तव में स्वर्ग की तरह है और दिल्ली का लड्डू नहीं है, वे आएंगे और इसे लेंगे और इसे खुले दिल से लेंगे। पर्याप्त समय होगा आखिरकार, हिंदू सभ्यता विभिन्न दिशाओं से घातों-प्रतिघातों, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक हमलों इत्यादि के बावजूद हजारों वर्षों तक