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माननीय अध्यक्ष : पहले संशोधन को प्रस्तुत होने दें।
श्री त्यागी : संशोधन के अनुसार मुसलमानों में हिंदुत्व ढूंढा जा रहा है, जो अधिनियम और संविधान के विरुद्ध है। हर एक को अपना धर्म मानने की स्वतंत्रता दी गई है और मुसलमानों और ईसाईयों को हिंदू संहिता में लाने का अर्थ उनके धर्म में बाधा पहुँचाना होगा।
माननीय अध्यक्ष : संशोधन प्रस्तुत किया जाए।
श्री त्यागी : यह संशोधन प्रस्तुत किया गया है और इसलिए यह अवैध है।
श्री इन्द्र विद्यावाचस्पति (उत्तर प्रदेश) : प्रस्ताव है कि खंड-2 के प्रतिस्थापन
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के लिए विकल्प।
‘‘2. यह संहिता सभी भारतीयों, वे किसी भी धर्म, जाति या मत के हों पर लागू होगी।’’ पंडित ठाकुर दास भार्गव : प्रस्ताव है कि :-
खंड-2 के लिए विकल्प :-
‘‘2. इस संहिता की धारा-1 के प्रावधानों के मुताबित इस प्रकार लागू हो :
(अ) उन सभी पर जो धर्म से हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख हैं।
(ब) किसी भी दूसरे व्यक्ति पर जो धर्म से मुसलमान, ईसाई, पारसी और
यहूदी नहीं हैं।
(स) सभी महिलाओं पर जिसका विवाह किसी भी व्यक्ति जो मुसलमान,
ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है।
(द) किसी भी वैध या अवैध बच्चे जिसके माता-पिता धर्म से मुसलमान,
ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं हैं।
(इ) जिन्होंने मुसलमान, ईसाई, पारसी या यहूदी धर्म को छोड़ धर्म परिवर्तन
करने वाला है।’’
श्री झुनझुनवाला (बिहार) : प्रस्ताव है कि खंड-2 के लिए विकल्प :-
‘‘2. संहिता का प्रयोग : यह संहिता भारत के सभी नागरिकों चाहे वे किसी भी जाति, लिंग के हों या किसी भी धर्म को मानते हों, पर लागू होगी।’’
डॉ. अम्बेडकर : प्रस्ताव है कि :-