हिंदू संहिता : जारी - Page 252

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‘‘एक स्त्री के लिए पाँच विपत्तियों में दूसरे पति का विधान है, जिनके नाम हैं, यदि पति लापता हो, या मर चुका हो, या दूसरा धर्म स्वीकार कर लेता है या नपुंसक है या जाति बहिष्कृत कर दिया जाता है।’’

पंडित मालवीय : क्या आप कृपा करके उससे संबंधित टीका भी पढ़ेंगे?

श्री बी. के. पी. सिन्हा : मैं इसे आपके लिए छोड़ दूँगा।

अतएव यह उतना अविलेय नहीं था जितना कि डॉ. मुखर्जी चाहते हैं हम विश्वास कर लें। कतिपय अपवादस्वरूप परिस्थतियों में हिंदू विवाह के विच्छेद के प्रावधान थे। इसके द्वारा, अप्रत्यक्ष रूप से संविदा के सिद्धांत को मान्यता दी गई थी। इतना ही नहीं नागरिक विवाह अधिनियम भी विवाह के सिद्धांतों को और इन प्रमाणों को अलग से मान्यता प्रदान करता है, आधुनिक युग में, भारत में विद्यमान परिस्थितियों में यदि हिंदू समाज के लिए हमारे पास तलाक संबंधी कानून नहीं रहता है तो हमें हिंदू समाज के छिन्न-भिन्न होने तथा पूर्ण विघटन के लिए तैयार रहना चाहिए।

इस संबंध में मुझे दो या तीन मामलों के बारे में बताया गया है। जिसने डॉ. मुखर्जी के गृह प्रांत बंगाल में अत्यधिक तहलका मचा दिया गया था। वहाँ हिंदू विधि का जैसा प्रचलन है वह तलाक के कोई अवसर नहीं देता है। मैं कम से कम दो मामलों को जानता हूँ जिसमें संबंधित पक्ष ब्राह्मण जाति के थे। वे विवाहित थे। कुछ समय तक उन्होंने सुखी जीवन व्यतीत किया। तत्पश्चात् उनका जीवन दुःखों से भरा था। इससे बच निकलने का उनके पास कोई उपाय नहीं था। दोनों ही मामलों में पत्नियाँ कलकत्ता के एक प्रसिद्ध मस्जिद में गईं तथा उन्होंने इस्लाम में धर्मान्तरण कर लिया और इसके द्वारा अपने-अपने विवाह का विच्छेद किया। भारत में समाज उस स्थिति में पहुँच गया है कि यदि आप के पास तलाक के कानून नहीं हैं तो आपको इस तरह की घटनाओं के लिए तैयार रहना होगा। मैं नहीं जानता कि डॉ. मुखर्जी इस प्रावधान के विरोध में खड़े होकर हिंदुओं का कोई भला कर रहे हैं या सभी धर्मान्ध समर्थकों की तरह हिंदू धर्म और हिंदू समाज का सकारात्मक नुकसान कर रहे हैं।

श्री चट्टोपाध्याय (पश्चिम बंगाल) : क्या वे बाद में हिंदू नहीं बन गए?

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श्री बी. के. पी. सिन्हा : किसी भी स्थिति में यह स्पष्ट है कि यदि आप तलाक चाहते हैं तो आपको किसी अन्य धर्म में धर्मान्तरण करना पड़ेगा। मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूँ।

इस तरह के कई मामले हैं जहाँ सिर्फ तलाक लेने के लिए पक्षों को धर्मान्तरण