हिंदू संहिता : जारी - Page 257

242 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हैं। परिस्थितियों के इन नवीन समुच्चयों को समेटने के लिए नियमों के निकाय का विकास पहले ही आवश्यक हो गया है।’’

* डॉ. देशमुख : मुझे भय है कि मेरे माननीय मित्रों जिन्होंने बोलने के लिए मेरे

खड़े होने का स्वागत ‘‘सुनो, सुनो’’ कह कर किया, को आज जो मैं बोलने जा रहा हूँ उससे निराशा होगी।

श्री आर. के. चौधरी : क्या आपने अपना विचार बदल दिया है?

डॉ. देशमुख : एक निश्चित सीमा तक, संभवतः हाँ।

एक माननीय सदस्य : बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा वही करते हैं।

डॉ. देशमुख : मैं प्रवर समिति का सदस्य रहा हूँ और मैंने समिति की रिपोर्ट में असहमति टिप्पण संलग्न किया है। उस असहमति टिप्पण से पता चलता है कि उन चार मुद्दों को छोड़कर मैं इस विधेयक के प्रस्तावित कई प्रावधानों पर आमतौर से सहमत हूँ। इसके साथ ही मैंने हमेशा ही यह महसूस किया कि वह समय नहीं आया था जबकि हिंदू समाज की पूरी संरचना को हमारे सम्मुख विद्यमान कुछ दूसरे और भिन्न आदर्शों के अनुसार पुनरीक्षण करना और इसे पूरी तरह से बदल देना संभव था। हमारा देश एक विशाल देश है और हिंदू समाज अतिशय बृह्त और अनेक व्यक्तियों से बना हुआ है। लोग अत्यधिक अशिक्षित और बिल्कुल निरक्षर भी है। उस दृष्टि से यदि आप हिंदू समाज के आधार को अत्यन्त तीव्र गति से या बड़े पैमाने पर बदलना चाहते हैं तो जो लोग इन परिवर्तनों को समझने में समर्थ नहीं हैं उन्हें अत्यधिक कष्ट उठाने होंगे। उस दृष्टिकोण में मैंने सोचा कि जहाँ तक हिंदू विधि में सुधारों का प्रश्न है, तथा जब आवश्यकता हो और जब कभी निश्चित परिस्थितियाँ उनकी माँग करती हों और केवल तभी जब जनमत सामाजिक संरचना में हमारे इच्छित परिवर्तनों के लिए तैयार हो और उसे इनकी पूरी जानकारी हो और इनका अनुसरण करने में समर्थ हो हमें उस तरह की बात का प्रयास करना चाहिए।

अतएवः मैं मानता हूँ कि हिंदू विधि संहिताबद्ध होने के बाद भी हमारे लिए तब तक उपयोगी नहीं होगा जब तक कि आप खुद पूरे हिंदू समाज का पुनर्निर्माण नहीं चाहते हैं और मैं कहता हूँ कि इसके लिए उचित समय अभी तक नहीं आया है। हिंदू विधि स्मृतियों के द्वारा निर्धारित की गई है एवं इनकी व्याख्या उच्च न्यायालयों तथा प्रिवी कौंसिल द्वारा की गई है जो बिल्कुल पारदर्शी हैं; कुछ मतभिन्नता हो सकती है; व्याख्याओं में द्वन्द्व की संभावना है किंतु ये समझ जाने योग्य हैं और हमें 150 वर्षों का इनका अनुभव है। इसके कारण से कोई बहुत बड़ी कठिनाई या कष्ट नहीं आया है....