हिंदू संहिता : जारी - Page 259

244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय सभापति : उसे स्थगित कर दिया गया है।

श्री कामथ : हमें कोई सूचना नहीं है।

माननीय सभापति : इसे यहाँ काट दिया गया है।

डॉ. देशमुख : जहाँ तक कठिनाइयों और कष्टों के निवारण का प्रश्न हैं मैं इस विधेयक के प्रायोजकों से भी आगे जाने को तैयार हूँ। बहुविवाह प्रथा का निषेध और एक विवाह प्रथा को शुरू करना और इसका प्रवर्तन अत्यधिक वांछित सुधार हैं मैं इस पर भी सहमत हूँ कि यह हिंदू समाज को विधि के अंतर्गत तलाक की व्यवस्था देने का उचित समय है। इस पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं; किंतु मैं नहीं सोचता कि दिखाई पड़ने वाली कुछ घटनाओं और तथ्यों की ओर से आँखें मूँद लेना संभव है। यह एक ऐसी बात हो सकती है जिसे मेरे कट्टरपंथी सनातनी मित्र नापसंद कर सकते हैं। निःसंदेह, उनमें से कई तनिक भी परिवर्तन पसंद नहीं कर सकते। दुर्भाग्यवश स्थिति यह है। यहाँ मुझे एक भ्राँति दूर करनी चाहिए। कुछ सनातनी मित्रों द्वारा मैं इस विधेयक का हर दृष्टिकोण से हर मामले में सख्त विरोधी माना जाता रहा हूँ। इसीलिए मैंने आरम्भ में ही यह टिप्पणी की थी कि मेरे माननीय मित्र पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गव संभवतः आज जो मैं बोलने जा रहा था उसका स्वागत नहीं करेंगे। तथापि, प्रावधानों को इन दो पहलुओं तक सीमित होना चाहिए।

पुनः मैं कुछ प्रावधान चाहूँगा जिसके द्वारा हम अपनी विधवाओं की दशा को बेहतर कर सकते हैं। मैंने अनेक घटनाएँ देखी हैं जहाँ उन्हें अमानवीय कष्ट झेलने पड़ रहे हैं। जहाँ तक संपत्ति में विधवाओं के अधिकारों का संबंध है हमारे पास संशोधनकारी विधेयक हैं। हम लोगों ने कतिपय विधियाँ पारित की हैं।

किंतु, मेरी जानकारी में, उनसे उनको कोई लाभ नहीं पहुँचा है जिनके लिए ये बनाए गए थे। मैं सदन के माननीय सदस्यों को प्रेरित करना चाहूँगा कि जहाँ तक उनका संबंध है हमें कुछ प्रावधान बनाने चाहिएं।

श्री भारती : हम लोग उस पर अभी चर्चा नहीं कर रहे हैं।

डॉ. देशमुख : मैं नहीं जानता यदि सदन में कोई घोषणा की गई है कि हम उन दूसरी धाराओं पर चर्चा नहीं करने जा रहे हैं तथा स्वयं को केवल इन धाराओं पर चर्चा तक ही सीमित रखेंगे यथा विवाह और तलाक। चूँकि मैं यहाँ नहीं था, मैं नहीं जानता कि क्या निर्णय किया गया है।

श्री भारती : संभवतः हम उन पर चर्चा करने जा नहीं रहे हैं।

माननीय सभापति : माननीय सदस्य को बोलने दीजिए।