हिंदू संहिता : जारी - Page 260

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डॉ. देशमुख : यदि यह इरादा किया गया है कि हमें केवल उस विधि के पारित करने तक स्वयं को सीमित रखना है जिसके अनुसार एक व्यक्ति एक समय में केवल एक ही पत्नी रख सकता है, मैं बहुत ज्यादा आपत्ति नहीं करूँगा। किंतु जैसा कि मेरे माननीय मित्र डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने बताया कि एक ऐसी चीज जो स्वयं ही नष्टप्राय है के बारे में अत्यधिक हो-हल्ला किया जा रहा है अस्तित्व के लिए मौजूद संघर्ष और आर्थिक शक्तियां कार्यशील हैं उनसे स्वयं ही वांछित परिवर्तन आ रहा है। अतएव, यद्यपि कि यह एक आवश्यक सुधार हैं, मैं नहीं सोचता कि इसमें ऐसा कुछ है कि कुछ लोग इसके लिए मरने को तैयार हो जाएं।

जहाँ तक तलाक का संबंध है, मैं सोचता हूँ कि तलाक के पक्ष में काफी कुछ बोला गया है। शीघ्रातिशीघ्र इस प्रावधान को बनाया जाना चाहिए। जैसा कि माननीय सदस्य बता चुके हैं कि यही एक मात्र अमूल्य विधेयक है, तलाक के लिए प्रावधान बनाने मात्र से - प्रावधान की मौजूदगी मात्र से यह अभिप्राय नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा इसका लाभ उठाया जाएगा और वह तलाक लेगा। मौजूदा स्थिति क्या है? कतिपय राज्यों में जैसे बड़ौदा में तलाक की अनुमति है। और कई जो आपस में सहमत नहीं हो सकते हैं या अन्य कारणों से एक साथ नहीं रह सकते, मात्र बड़ौदा चले जाते हैं और वहाँ कुछ समय तक ठहरते है और किसी तरह वहाँ का निवासी होने का प्रमाण पत्र हासिल कर लेते हैं और इस तरह से अपने उद्देश्य को अंजाम देते हैं। जहाँ कहीं भी विवाहित दम्पति किसी भी कारण से साथ नहीं निभा सकते, यह इसलिए भी हो सकता है कि दोनों में से एक किसी बुरे रोग से पीडि़त है या कई अन्य कारणों से उनके संबंधों में गिरावट आ जाए और वे एक दूसरे से अलग हो सकें। आधुनिक दशाओं में यह अपेक्षा करना मानवीय है कि उन्हें यह स्वतंत्रता दी जाए और किसी के लिए तलाक लेना और अलग होना संभव हो सके। उस दृष्टिकोण से मैं कहता हूँ कि जहाँ तक तलाक के प्रावधानों का संबंध है, ये वांछनीय हैं। किंतु एक मुद्दे पर मैं डॉ. अम्बेडकर से पूरी तरह असहमत हूँ और वह रीति सम्मत तलाक को मान्यता नहीं प्रदान करने से संबंधित है। वह चाहते हैं कि सभी तलाक के मामले अवश्य....

श्री आर. के. चौधरी : मैं चाहता हूँ कि एक बात स्पष्ट कर दी जाए। क्या

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माननीय सदस्य सांस्कारिक विवाह के विच्छेद और साथ ही सांस्कारिक विवाहों के जारी रहने की भी वकालत करते हैं?

डॉ. देशमुख : मैं नहीं सोचता कि इसमें कोई कठिनाई होगी। अभी भी बड़ी संख्या में सांस्कारिक विवाहों का विघटन होता है। यह विभिन्न समुदायों और हिंदू विधि के तहत होता है। और कौन कहने जा रहा है कि तथाकथित पिछड़े समुदायों में विवाह जो वास्तव में दूसरों से अधिक विकसित हैं सांस्कारिक नहीं हैं? वे हैं और