हिंदू संहिता : जारी - Page 262

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कि विगत में हम विवाह को सांस्कारिक मानते थे न कि एक से संविदा। जैसा कि मैं पहले ही कह चुका हूँ कि रीति के अनुसार सांस्कारिक विवाहों का भी विच्छेद किया जा सकता था। आखिरकार सांस्कारिक विवाह को मान्यता प्रदान करना रीति सम्मत विवाह को मान्यता प्रदान करना है क्योंकि यह केवल प्रथा द्वारा शासित होता है। विवाह के कई स्वरूप हैं। कुछ मामलों में सप्तपदी हैं। मैं आशा करता हूँ कि रीति सम्मत तलाक के बाबत मैंने जो परिवर्तन सुझाए हैं वह स्वीकार्य होंगे। मूलतः इरादा यह था कि सभी प्रथा को एक ही साथ बिल्कुल खत्म कर दिया जाए। मुझे प्रसन्नता है कि डॉ. अम्बेडकर ने अपने इस विचार को बदल दिया है किंतु मुझे भय है कि उन्हें इसमें और परिवर्तन करना होगा। एक जगह पर जहाँ उन्हें अपने दृष्टिकोण को समझाना पड़ा था उन्होंने कहा था कि प्रथा को ऐसा होना चाहिए कि यह संवेदनशील, विवेकसंगत और कतिपय दूसरी आवश्यकताओं को पूरी करता हो। उन्होंने उम्मीद की थी कि प्रथा युक्तियुक्तता के मापदंड के अनुरूप होंगे। किंतु युक्तियुक्तता क्या है? यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति और एक समूह से दूसरे समूह के लिए भिन्न-भिन्न हो सकता है। डॉ. अम्बेडकर जिसे युक्तियुक्त मानेंगे वहीं श्री कामथ या पंडित एम. बी. भार्गव के लिए बिल्कुल ही अनौचित्यपूर्ण होगा....।

श्री कामथ : क्या आप हमें एक-सा समझते हैं?

डॉ. देशमुख : नहीं, नहीं! एक साथ नहीं अपितु अलग-अलग। प्रथा के दृष्टिकोण से मुझे अवश्य कहना चाहिए कि विद्वान डाक्टर थोड़ा और आगे जाने के इच्छुक अवश्य होंगे, क्योंकि प्रत्येक प्रथा का अपना एक इतिहास होता है और तर्क के आधार पर इस पर बहस नहीं की जा सकती। मूलतः इस संहिता के प्रयोजकों का विचार यह था कि प्रथा चाहे या जो कुछ भी था, बुरा थी। यही कारण था कि उन्होंने प्रावधान किया कि सारी ‘‘प्रथा’’ बुरी थी और किसी भी परिस्थिति में किसी भी प्रथा को मान्यता प्रदान नहीं की जाएगी। पूरे समाज को संहिता के लिखित प्रावधानों द्वारा शासित होना था और किसी भी प्रकार के विचलन को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। सौभाग्यवश, आप उस स्थिति में पहुँच गए हैं जब आप प्रथा को मान्यता देने के लिए तैयार हैं। लेकिन किस सीमा तक यह एक प्रश्न है? एक ओर आप कहते हैं कि इसे युक्तियुक्त होना चाहिए किंतु कई दृष्टांतों में यह स्पष्टतः स्वयं विरोधी कथन है.... डॉ. अम्बेडकर : क्यों?

पंडित ठाकुरदास भार्गव : इसे मान्यता दी जाए इसके पूर्व इसे युक्तियुक्त होना

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होगा।