हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 265

250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्रीमती दुर्गाबाई (मद्रास) : क्या माननीय सदस्य माननीय सदस्यों के फायदे के लिए इन महिलाओं को नाम हमें देंगे, क्योंकि यह जिन महिलाओं का वैसा विचार नहीं है उनका मान घटा सकता है।

माननीय उपाध्यक्ष : दो महिलाएँ पूरे विश्व का भाव व्यक्त नहीं करती हैं।

डॉ. देशमुख : वे उसी तरह से प्रतिनिधि हैं जिस तरह से मेरी विद्वान बहन यहाँ इस सभा में होने का दावा कर रही हैं। और महोदय, उनका यह भी मत है कि वे अपनी चर्चाओं से बहुत से ऐसे लोगों का विचार बदलने में समर्थ हुई हैं जो यहाँ मेरी माननीय बहन के साथ सहमत थे और जिनका रुझान उनकी ओर था। वे तलाक का विरोध करती हैं क्यों वे कहती हैं....

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प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री (श्री जवाहरलाल नेहरू) : वे कौन हैं?

डॉ. देशमुख : महोदय, मैं सोचता हूँ कि इस हस्तक्षेप से माननीय प्रधानमंत्री ने यह कथन स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने उन्हें नहीं देखा है।

श्री जवाहरलाल नेहरू : मैं नहीं जानता कि वे कौन हैं?

डॉ. देशमुख : भारत में एक ‘वूमेन्स लीग’ मौजूद है और....

श्रीमती दुर्गाबाई : जी हाँ, इससे किसी को इंकार नहीं है; किंतु हम उन दो महिलाओं के नाम जानना चाहती हैं।

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का हवाला दे रहे हैं जो सदन से बाहर के हैं और जो स्वयं का बचाव करने की स्थिति में नहीं हैं।

माननीय उपाध्यक्ष : बचाव या हमले का कोई प्रश्न नहीं है।

डॉ. देशमुख : मुझे प्रसन्नता है कि श्रीमती दुर्गाबाई ‘‘वूमेन्स लीग’’ के अस्तित्व को मानती हैं....

माननीय उपाध्यक्ष : कई विचार प्रचलित हैं और इस संहिता पर भी तरह-तरह के मत हैं। माननीय सदस्यों को यह कहने का हक है कि एक निश्चित विचार प्रचलित है कि कुछ महिलाएं उनके पास आईं और उसे अभ्यावेदन दिया। महिलाओं का और आगे संदर्भ जरूरी नहीं है। उन लोगों के ऐसे विचारों को स्वीकार करना या अस्वीकार करना सदन पर निर्भर करता है। जहाँ तक सदस्य उस मत का उल्लेख करना चाहते हैं, जिसका वह समर्थन करने जा रहे हैं या जिसका वह खंडन करने जा रहे हैं, तो वह बार-बार दो महिलाएँ कहने के बजाए ऐसा कह सकते हैं।