हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 267

252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है। माननीय सदस्य को बार-बार इन दो महिलाओं का उल्लेख नहीं करना चाहिए था न केवल दो अपितु दो हजार इस संहिता के विरुद्ध हैं और बीस लाख दूसरी ओर भी हैं। अतएव इसके पक्ष और विपक्ष दोनों तरह के विचार हैं। यहाँ हम लोग इस विधेयक पर निष्पक्षतापूर्वक चर्चा कर रहे हैं। ऐसा कुछ नहीं कहा जाना चाहिए जिससे इस सभा की उच्च गरिमा घटती हो। अज्ञात महिलाएँ और अवगत पुरुष ऐसी अभिव्यक्तियां नहीं हैं जो बहुत ही संसदीय हों। माननीय सदस्य को बार-बार दो महिलाएँ कह कर विषय को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है।

डॉ. देशमुख : मुझे ऐसा करने की इच्छा नहीं थी किंतु व्यवधानों के कारण ऐसा करना पड़ा। श्रीमान्, अब मैं इस सभा में रखे गए विभिन्न संशोधनों पर आऊँगा। मेरे मित्र डॉ. मुखर्जी ने इस संहिता को स्वीकार्यता के कई विकल्प सुझाए। इनमें से एक इस संहिता के प्रावधानों को वैकल्पिक बनाना था। इस आशय से भी एक संशोधन है कि एक जनमत-संग्रह होना चाहिए और यदि बहुसंख्या जनता इस संहिता का समर्थन करती है तो इसे प्रयोज्य बनाया जाना चाहिए। मैंने पिछली बार एक संशोधन की सूचना दी थी जो समग्र हिंदू संहिता से संबंधित था और यह सुझाव दिया था कि इसे किसी राज्य पर अगले चुनावों के बाद राज्य की विधानमंडल द्वारा अनुसमर्थन करने के बाद ही प्रयोज्य बनाया जाए। राज्य सरकारों और राज्य विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थन संबंधी सुझाव में काफी बल है। आखिरकार हम हिटलर और अन्य तानाशाही द्वारा जनता पर समाज और अन्य सुधारों को थोपने के काम का अनुसरण नहीं कर सकते हैं। हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं और लोकतांत्रिक पद्धतियों के अनुसार ही करना चाहते हैं। यदि लोकतंत्र को रहना है और चूँकि यह पर्सनल लॉ मात्र है न कि कानून और व्यवस्था को बनाए रखने या अन्य प्रयोजनों (कुछ लोगों की दृष्टि में समुदाय के विकास के लिए यह आवश्यक हो सकता है) के लिए आवश्यक विधि अतएव दो तरह के मत हो सकते हैं तथा दोनों ही उतने ही सत्य और दृढ़ हो सकते हैं।

सुझाए गए कुछ सुधारों के मामलों में विश्व में अन्यत्र भी अनुभव सर्वथा सुखद नहीं रहे हैं। उदाहरण के लिए तलाक के कानून को लें। तलाकों की विभिन्न श्रेणियाँ हैं और विश्व में इनके लेने के भी विभिन्न तरीके हैं। जिन्होंने तलाक की वकालत की थी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के आधार पर समान को संगठित करना चाहते थे विपत्ति में पड़ गए हैं और विदेशों में इन परिणामों को देखकर, जब हमारे कुछ लोग दूसरों की नकल मात्र करना चाहते हैं, क्योंकि वे उस दृष्टिकोण की वकालत करना फैशन समझते हैं, कुछ लोगों को यह भय सताता है कि इस तरह की नकल नितान्त पागलपन और भेड़चाल है नितान्त नकल की वह भावना है और इसका समर्थन भी