हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 268

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है क्योंकि इन लोगों को कभी भी विदेशों में हुए वास्तविक परिणामों के अध्ययन करने का धैर्य नहीं था। इसी तरह से जो सुधारवादियों के दृष्टिकोण को नहीं मानने वाला कट्टरपंथी मत भी उतना ही सत्यनिष्ठा और सुदृढ़ है। जब हम जानते हैं कि हिंदू धर्म, हिंदू विधि और हिंदू प्रथा हजारों वर्षों तक इतिहास के घातों-प्रतिघातों पर भी टिकी, सहज ही हम यह समझते हैं कि यही एक या राष्ट्र या समुदाय है जिसका अपना कुछ है और उनके सपाट एकरूपता के बावजूद भी, जिसके परिणाम कई मामलों में बुरे हुए हैं, जिस तरह से विगत हजारों वर्षों में एक पद्धति विकसित की जाती रही उसी तरह की पद्धति को विकसित करने का प्रयास क्यों नहीं किया जाए। मैं दावा करता हूँ कि सदियों से विकसित हिंदू धर्म और हिंदू विधि एक धर्म और एक विधि है। ये कभी स्थिर नहीं रहे तथा डॉ. अम्बेडकर यह स्वीकार करेंगे कि हिंदू विधि और प्रथा कभी भी जड़ नहीं रही इन्होंने समय-समय पर परिस्थितियों के साथ अपना समाजन किया है और इसके बाद भी ऐसा करने में सक्षम हैं।

यह उदाहरण दिया गया है कि चीनी और अमेरिकी कहते हैं कि हम पिछड़े हुए लोग हैं क्योंकि हमारी सामाजिक पद्धति वैसी-वैसी नहीं है। हमारे समाज पर प्रभाव डालने वाले वैसी टिप्पणियों को मान लेने से पहले और उनके दृष्टिकोण को मानने की प्रवृत्ति होने से पहले, हमें यह जानना आवश्यक है कि वे लोग क्या हैं। क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इन चीनियों और अमेरीकियों ने हमारे धर्म और विधि के बारे में कितना अध्ययन किया है? क्या उन्होंने हमारे समाज की निन्दा करने या सुधार के कोई सुझाव देने से पूर्व हिंदू धर्म की भावना को आत्मसात किया है? यह अत्यन्त ही प्रासंगिक प्रश्न है। सिर्फ यह कह देने मात्र से कि विदेशियों का एक समूह हमें पसन्द नहीं करता और वे हमारी विधि या प्रथा में कुछ परिवर्तन का सुझाव देते हैं, को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि हम सिर्फ व्यक्तियों के समूह को उनके दृष्टिकोण की पृष्ठभूमि को समझे बिना खुश करने का प्रयास करेंगे तो हम लोगों की भी नियति उसी गधे की तरह होगी जिसे एक वृद्ध और उसका बेटा लेकर जा रहे थे और जिन्होंने मार्ग में मिलने वाले सभी राहगीरों को प्रसन्न करने का प्रयास किया। आरम्भ में वे गधे को ले जा रहे थे तथा वह व्यक्ति और उसका पुत्र पीछे-पीछे चलता रहा। इस पर भी लोग उस पर हँस पड़े, ‘‘वृद्ध आदमी गधे पर सवार हो कर जा रहा है तथा अपने छोटे से बेटे को पैदल चलने के लिए छोड़ दिया है।’’ इसलिए लड़का भी....

माननीय उपाध्यक्ष : हर एक को गधे की कहानी मालूम है।

श्री भारती (मद्रास) : यहाँ गधा कौन है?