हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 269

254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. देशमुख : मैं लोगों को यह बताना चाहता हूँ कि वे मूर्ख बन रहे हैं....

माननीय उपाध्यक्ष : यहाँ गधे की कहानी का ब्यौरा देने की की जरूरत नहीं है।

डॉ. देशमुख : मैंने इस कहानी का उदाहरण नहीं दिया होता किंतु चूँकि बार-बार मूर्ख बनाने का काम हो रहा है अति संवेदनशील व्यक्ति जो किसी भी तरह से विदेशियों के मतों के मूल्य को समझते हैं। वह भाग उस तथ्य से हमें प्रेरित और प्रभावित करना चाहते हैं। वे कहते हैं चूँकि कतिपय विदेशी कहते हैं कि कुछ परिवर्तन होने चाहिए। कम से कम मैं वैसे विचारों को न केवल सुनूँगा अपितु किसी को भी इस आधार पर अपना दृष्टिकोण देते हुए भी पसंद नहीं करूँगा।

जहाँ तक इस संहिता के आधार का संबंध है इसे सिर्फ वहाँ ही शुरू करना चाहिए जहाँ हम समझते हैं कि परिस्थितियों की यह माँग है और जनता की इच्छा के प्रतिकूल इन चीजों को बलपूर्वक नहीं लादना चाहिए। यह सच्चाई है कि शिक्षित महिलाओं का बहुत बड़ा वर्ग इस संहिता का समर्थन कर रहा है। उनके बारे में कहा जाता है कि उनका पक्का विचार है कि इस संहिता का पारित किया जाना आवश्यक है। यदि हम विशेषकर भारत की महिलाओं में शिक्षा के स्तर का विश्लेषण करें तो हम यह पाएँगे कि ये महिलायें ऊँट के मुँह में जीरा की तरह हैं; हमारे कानून में आमूल सुधार और परिवर्तन की माँग करने वाली इन महिलाओं की सीमा अत्यल्प है। दूसरी ओर वे इतनी अधीर हैं कि उन महिलाओं को जो सिवाए अंग्रेजी और विदेशी शिक्षा के भी उतनी ही समझदार हैं के दूसरे दृष्टिकोण को सुनने तक के लिए तैयार नहीं हैं। जब मैं किया ‘‘वे’’ संबोधन का प्रयोग, मैं हमारे गाँवों में रहने वाली उन लाखों महिलाओं को संबोधित कर रहा था जिन्हें भी उतना ही विवेक है और जो जानती हैं कि वे क्या हैं तथा वे क्या होना चाहती हैं; ये वहीं हैं जो आपके द्वारा सुझाए गए इन परिवर्तनों से चिंतित हैं क्योंकि तलाक की अनुमति मात्र प्रत्येक व्यक्ति और समग्र रूप से समाज की मानसिकता को बदलने जा रहा है। जो प्रश्न मैं पूछना चाहता हूँ वह है - क्या आप तलाक के विचार के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने जा रहे हैं, या आप स्थायी तौर पर एक साथ रहने के विचार के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने जा रहे हैं? यदि आप तलाक के आसान उपायों को अपनाने जा रहे हैं तो इससे मानसिकता में भारी परिवर्तन होने जा रहा है। निःसंदेह हम उस परिवर्तन और परिणामों को भुगतने के लिए तैयार हैं। किंतु इस विधेयक को पारित कराने की प्रायोजक और समर्थक शिक्षित महिलाओं ने विशेषकर अशिक्षित महिलाओं के समुदाय पर गिरने वाली गाज के बारे में नहीं सोचा है। एक शिक्षित लड़की तलाक के बाद अपने पैरों पर खड़ा होने में समर्थ हो सकती है, कहीं भी अच्छे वेतन वाली नौकरी