हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 280

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कि जनमत किस ओर है। मैं सोचता हूँ कि वह ठीक हैं। हम जनमत के होने का दावा....

पंडित मालवीय (उत्तर प्रदेश) : क्या सरकार चुनाव में हिंदू संहिता को एक मुद्दा बनाने जा रही है?

श्री गाडगिल : यह सरकार के बिना ही बन चुका है। बात यह है कि यह कहना कठिन है कि जनमत किस ओर है। मैं इस सभा के माननीय सदस्यों से बड़ी विनम्रतापूर्वक एक प्रश्न करना चाहता हूँ। क्या सरकार को, जिसमें अभी भी इस सभा को विश्वास है, सामाजिक सुधार शुरू करने का कुछ अधिकार है या नहीं, न केवल अधिकार वरन् संविधान के खंडों के अनुसार सरकार का उत्तरदायित्व है या नहीं? आपने हमें कतिपय निदेश दिए हैं, आपने कुछ उद्देश्य निर्धारित किए हैं। यदि हम उस दिशा में कुछ नहीं करते हैं तो मतदाता विमुख हो सकता है और कह सकता है; ठीक है आपने यह संविधान सिर्फ हम लोगों को मूर्ख बनाने के लिए पारित किया है। इस देश की जनसंख्या का आधार अर्थात् स्त्रियां कहेंगी आप सामाजिक न्याय की बात करते हैं किंतु वह सामाजिक न्याय कहाँ है। (एक माननीय सदस्य : प्रश्न) मुझे विश्वास है कि यदि वह जनमत संग्रह कराते हैं तो माननीय सदस्य अपने ही घर में पराजित हो जाएंगे।

पंडित मित्रा (पश्चिम बंगाल) : क्या माननीय सदस्य आधी जनसंख्या को आधे दर्जन स्त्रियाँ कहते हैं?

श्री गाडगिल : मैं अपनी बहनों के लिए अपने माननीय मित्र की अपेक्षा ज्यादा बेहतर ढंग से सोचता हूँ। तथापि, जैसा कि मेरे माननीय सदस्य ने कहा, अगले कुछ महीनों में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। बात यह है कि विधानमंडल ने हिंदू जीवन, हिंदू विवाह, तलाक, वास्तव में कानून के प्रत्येक पहलू को प्रभावित करने वाले कई संविधियों को लागू किया है। अतएव, हम अभी यह नहीं कह सकते हैं कि इस संसद को कोई अधिकार नहीं है। इस संसद को अधिकार है या नहीं इसका मैं पहले ही उत्तर दे चुका हूँ। जहाँ तक इस संसद को इस देश के लिए संविधान बनाने में सक्षम समझा गया है मैं इस तर्क को नहीं समझ पा रहा हूँ कि यह संसद एक साधारण विधि को पारित करने में सक्षम नहीं है।

पंडित मैत्रा : सदन का निर्वाचन संविधान बनाने के लिए हुआ था।

श्री गाडगिल : इस सदन ने संविधान पारित किया जिसमें उन्होंने अस्थायी प्रावधानों से संबंधित अध्याय भी पारित किया। मैं नहीं समझता कि मेरे माननीय मित्र पंडित मैत्रा ने उस समय आपत्ति की और कहा कि इस संसद को अभी से