हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 291

276 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निश्चित रूप से ऐसा लगता है कि वे चाहते हैं कि सदन या तो इन उपायों को स्वीकार कर ले या फिर इन्हें अस्वीकार कर दें। वास्तव में, एक समय मैंने इसे

खत्म करना स्वीकार किया.... अनेक माननीय सदस्य : नहीं, नहीं।

पंडित मेत्रा : यह इस बिल का महत्वपूर्ण भाग है।

डॉ. अम्बेडकर : यहां तक कि मैं दस दिन बाद भी इसका समाधान करने को तैयार हूँ।

पंडित मैत्रा : आप इसे 15 दिन बाद करें। आप इसका अनुप्रयोग ऐच्छिक कर दें तो हम इसे तुरन्त पारित कर देंगे।

माननीय उपाध्यक्ष : इस धारा पर 17 या 18 सदस्य पहले ही बोल चुके हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल) : वह सब पूरी तरह भुलाया जा चुका है।

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माननीय उपाध्यक्ष : इसीलिए मैंने सभी खंडों के उल्लेखों की अनुमति दी है। यह विचार-विमर्श इस विधेयक के समस्त पहलुओं पर हो रहा है और यह मात्र खंड दो तक सीमित नहीं है। हमें इस चर्चा का कभी-न-कभी अंत करना है। इसलिए, माननीय सदस्यों से मेरा अनुरोध है कि वे उन्हीं मामलों को उठायें जो धारा 2 और उसमें संशोधनों से सम्बद्ध हैं। मैं इस चर्चा को समाप्त नहीं करना चाहता लेकिन इस तरह तो यह चर्चा अंतहीन होगी। अक्सर ऐसा होता है मैं जब भी पंडित कुंजरू को बोलने के लिए आमंत्रित करता हूँ मुझे इस सदन को कुछ सुझाव देने पड़ते हैं लेकिन इनका आशय विशेष तौर से, पंडित कुंजरू के लिए नहीं लगाया जाना चाहिए।

श्री आर. के. चौधरी : माननीय मंत्री महोदय जो अभी-अभी इस विषय पर बोल चुके हैं, उन्हें इसका उत्तर दिया जाना चाहिए और क्या हमें उनका अनुसरण नहीं करना चाहिए?

पंडित मैत्रा : हमें अभी बताया गया है कि यह विधेयक अपने पहले दो भागों के साथ पेश किया जाएगा। आप ये आसानी से समझ सकेंगे कि खंड 2 व 4 पूरी संहिता की महत्वपूर्ण धाराएं हैं। इन दो खंडों के पारित होने के बाद आप फ्रंटियर या पंजाब मेल की गति से आगे बढ़ सकते हैं। मुख्य प्रश्न तो इस कानून को उन समुदायों पर लागू करना है जिनका इसमें उल्लेख किया गया है। आपको केवल इस तथ्य से ही संतुष्ट नहीं हो जाना चाहिये कि इस विषय पर 16 या 17 सदस्य बोल चुके हैं। आप 30 करोड़ व्यक्तियों के लिये कानून बना रहे हैं इसलिये इस