हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 299

284 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस विधेयक के कारण हिंदू समाज में अशान्ति पैदा हो गई है। इसका कारण यह है कि लोगों को इस विधेयक के बारे में गलत जानकारी दी जाती है। यदि इस विधेयक के बारे में उन्हें विस्तार से बताया जाये तो उनकी बहुत सारी भ्रांतियाँ दूर हो सकती हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि वे व्यक्ति जो इस सभा में न व्यक्तियों की शंकाओं के बारे में बोल रहे हैं वे निश्चित तौर पर उन्हें बतायेंगे कि वास्तव में इस विधेयक के प्रावधान क्या हैं?

पं. मैत्रा : सरकार को यह काम करने दे।

पं. कुंजरू : तो उनका सारा असंतोष दूर हो जायेगा। सरकार इसके यथार्थ ज्ञान के लिये यथा संभव प्रयत्न कर रही हैं, लेकिन क्या यह उन लोगों का भी कर्तव्य नहीं है जो हिंदू धर्म की सच्चाई एवं आध्यात्मिकता पर विश्वास करते हैं, कि वे इस कार्य में सरकार का हाथ बटायें? इस विधेयक के बारे में जो भ्रांतियाँ पैदा कर दी गई हैं वे उनको दूर करने के लिये प्रयास क्यों नहीं छोड़ देते?

पं. मैत्रा : इसका निर्णय उन्हीं पर क्यों नहीं छोड़ देते?

पं. कुंजरू : आप पूरी तरह से तथ्यों की अवहेलना कर रहे हैं। मैं मानता हूँ कि मैं उन्हें समझाने में समर्थ नहीं हूँ।

पं. मैत्रा : मेरा भी यही दुर्भाग्य है?

पं. कुंजरू : यदि ये तथ्यों से अपनी आँखें मूँदे रहते हैं....

पं. मैत्रा : मेरी निगाह सीधे तथ्यों पर ही है।

पं. कुंजरू : और ये कहते हैं कि इस विधेयक के प्रस्तुत करने से पूर्व भारत में किसी ने एक विवाह और तलाक जैसे शब्दों का नाम ही नहीं सुना था।

श्री आर. के. चौधरी : एक विवाह का मतलब है नीरसतापूर्ण जीवन।

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पं. कुंजरू : मेरे विचार से जो लोग इन उपबन्धों में निहित सिद्धान्त का समर्थन कर रहे हैं, जो स्त्री-पुरुष के मध्य पूर्ण समानता स्थापित करने का प्रयत्न कर रहे हैं, जो हिंदू समाज के पुनरुत्थान पुनरुद्धार के लिये प्रयत्नशील हैं, जो उन सिद्ध ान्तों के प्रतिस्थापन के लिये यत्नवान हैं जिन्होंने हिंदू धर्म को विश्व में महान तथा प्रतिस्पर्धी बनाया था, वे हिंदू धर्म तथा संस्कृति की महान् सेवा कर रहे हैं मुझे आशा है कि वे अपने चुने हुए मार्ग पर दृढ़तापूर्वक चलते रहेंगे तथा हिंदू धर्म को विश्व में वही सम्मानित स्थान दिलायेंगे जो उसका शताब्दियों पूर्व था।