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श्री जे. आर. कपूर : महोदय, मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मैं यह प्रार्थना कर रहा हूँ। प्रारम्भ में मैंने यह संशोधन श्री झुनझुनवाला के संशोधन नं 13 की पूरक सूची संख्या-1 में ही रखा था। लेकिन उसके बाद कार्यालय ने इसको एक अच्छी शक्ल देने की गरज से सोचा कि इसे अलग से ठोस संशोधन के रूप में रखा जाए।
माननीय महोदय : अच्छी बात है। इसमें कुछ परिवर्तन के कारण मैं इसे प्रस्तुत करने की अनुमति देता हूँ।
श्री जे. आर. कपूर : मेरा प्रस्ताव है कि :-
( i ) खंड-2 के स्थान पर ‘‘2. संहिता का प्रयोग : यह संहिता इसका कोई भाग भारत के सभी नागरिकों पर लागू होगा, जो वयस्क होने के पश्चात् लिखित में यह घोषित करेंगे कि वे इस संहिता व उसके किसी भाग या भागों के तहत आते हैं जैसी कि परिस्थिति होगी और ऐसी घोषणा को केन्द्रीय सरकार के द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार पंजीकरण करवाएंगे।’’
एक प्रस्ताव यह भी है कि :-
( ii ) श्री बनारसी प्रसाद झुनझुनवाला द्वारा सुझाए गये संशोधन में खंड-2 के लिए प्रभावित परन्तुक में शब्दों के लिए शुरू के शब्दों के साथ ‘‘जब तक कि ऐसा व्यक्ति’’ के अन्त में, यह प्रतिस्थापित किया जाए’’ :
‘‘जब तक ऐसा व्यक्ति वयस्क होने के पश्चात् लिखित में घोषित न करे कि वह जो भी परिस्थिति होगी, इस संहिता के तहत आता है और इस घोषणा को केन्द्रीय सरकार द्वारा इस उद्देश्य से घोषित नियमों के अनुसार पंजीकृत करवाए।’’
माननीय अध्यक्ष : संशोधन प्रस्तुत करें :-
खंड-2 के स्थान पर :
संहिता का प्रयोग- (1) यह संहिता सभी हिंदुओं पर लागू होती है।
(2) इस संहिता में ‘हिंदू’ का आशय है जब तक कि कोई कारण न हो, भारत
का नागरिक।
(3) जब तक कि विशेष विवाह-कानून, 1872 (1872 का III ) में कुछ और न
दिया गया हो, जैसा कि विधेयक में परिभाषित है यह संहिता सभी बिन्दुओं
पर लागू होगी और जो विवाह इस संहिता को लागू होने से पहले उस
कानून के अंतर्गत हुए हैं।