हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 304

289

हम लक्ष्य के निकट पहुंच गये हैं तो किसी को नाराज क्यों किया जाये। विधेयक का अच्छे से अच्छा प्रयास हमारे सामने रख दिया जाये ताकि स्पष्ट रूप से यह पता चल सके कि हमें और कितना आगे बढ़ना है। आप केवल एक बात को ही हमारे सामने क्यों रख रहे हैं। हमें तो प्रत्येक धारा की जांच पड़ताल करनी है। डॉ. अम्बेडकर तो आज इतने आतुर हो गये हैं कि वो हर हाल में बच्चा पैदा करना चाहते हैं ‘‘भले ही वो अंधा हो, लूला-लंगड़ा हो, हाथ-पांव हो या ना हो। अभी तो एक मात्र इच्छा यह है कि बेटा पैदा हो जाये ताकि उन्हें कोई पिण्ड दान देने वाला हो जाये।

एक माननीय सदस्य : ताकि उन्हें मुक्ति मिल जाये?

e ku u h;
ln L;

श्री भट्ट : क्षमा कीजिये। उनकी हजार साल की अवस्था हो, मैं तो रूपक में बोल रहा हूँ। यदि डॉ. अम्बेडकर और पंडित जवाहरलाल नेहरू इस विधेयक को पारित कराने में इतनी अधिक रुचि रखते हैं, और यह समझते हैं कि वे विधेयक का विरोध करने वाले ‘‘पागलां’’ को समझा देंगे, दबा देंगे, तो आप किस तरह से भी चाहे उन्हें समझायें, दबायें। हम आपके हैं और शायद आपके प्रभाव में दब भी जायें लेकिन आप कृपया ऐसा कानून न बनायें जो आधा-अधूरा, नियम विरुद्ध और निकृष्ट हो। अपितु ऐसा कानून बनायें जो उत्कृष्ट हो। आप यह क्या कहते हैं कि हम आपके विचारों को जगह देने के लिये यह भी कहते हैं, वो भी करते हैं, अगर आप ठीक नहीं मानते तो मत कीजिये। आगामी लोकसभा में अगर हम निर्वाचित हो कर आये तो हम और ज्यादा हिम्मत के साथ कहेंगे कि देखिये साहब, हम अपने मतदाताओं का आदेश ले कर आये हैं इसलिये इस बारे में अब हम और किसी का आदेश मानने वाले नहीं हैं। इसके लिये जो हमारी जनता कहती है हम उसी को मानें। मैं एक चुप रहने वाला आदमी हूँ और इस विषय पर कुछ अधिक नहीं कहना चाहता। मैं एक-दो रोज पहले एक कारखाने में गया। वहां के लोग कहने लगे कि यह हिन्दू संहिता विधेयक क्या रोना है? तो मैंने पूछा कि आप लोग इस बात पर घबराते क्यों हैं। तो उन्होंने कहा ‘‘इससे हमारे धर्म का नाश हो रहा है, समाज बरबाद हो जायेगा और बड़ी अवनति हो जायेगी।’’ तो मैंने उन कारखाने वालों को बुलाया और उनसे बातें कीं। उनमें से कई समझदार व्यक्ति थे और जिन्होंने इस विधेयक का प्रारूप पढ़ा था। हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि जो व्यक्ति इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं वो इसे बिना पढ़े या बिना समझे कर रहे हैं। उन्होंने तलाक सम्बन्धी प्रावधान का उल्लेख करते हुये कहा कि रीति-रिवाजों के मुताबिक इस समय तलाक लेना कहीं अधिक आसान है। उन्होंने पूछा कि आप इस तरह का कानून बना कर हमें अदालत में क्यों घसीटना चाहते हैं और क्यों चाहते हैं कि वहाँ हम अपनी स्त्रियों को व्याभिचारिणी कहें और स्त्रियाँ-पुरुषों को बदचलन कहें? इससे तो अच्छा यह है कि हम अपनी बिरादरी