290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की पंचायतों में बैठ कर इन बातों पर आपस में चर्चा करेंगे और किसी दम्पत्ति के बारे में जो लोग अच्छी तरह जानते हैं वे उन्हें अलग कर देंगे। इस बात पर गहराई से विचार किये जाने की आवश्यकता है। क्या डॉ. अम्बेडकर यह तर्क देंगे कि कई जगह तलाक देने के नियम बहुत सरल हैं और उन्हें इतना सरल नहीं होना चाहिये क्योंकि इससे हिंदू धर्म खतरे में पड़ सकता है? मैं नहीं समझता कि हिंदू धर्म को इससे कोई खतरा है। कुछ लोग कहते हैं। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं कि इस विधेयक के पारित होने से हिंदू धर्म खतरे में पड़ जायेगा। अब, कौन सही है कौन गलत है इसके लिये हमें अपनी अक्ल लड़ानी पड़ेगी। हर किसी को विचार करना होगा। मैंने कारखाने वालों से पूछा कि वे इस विषय में और क्या सोचते हैं तो उन्होंने पिता की जायदाद में लड़की के हिस्से की बात कही। मैं आपको केवल यह बताना चाहता हूँ कि जो लोग विधेयक का विरोध कर रहे हैं, वे न तो पागल हैं और न ही बिना सोचे-समझे ऐसा कर रहे हैं। आदर्श महिला संघ की कुछ महिलाऐं मेरे पास आईं और उन्होंने भी यही सवाल किया। वे महिलायें भी बुद्धिमान और समझदार हैं। इसमें संदेह नहीं कि माननीय सदस्य श्रीमती रेणुका रे, दुर्गाबाई या जो दूसरी महिला सदस्य हैं वे ज्यादा पढ़ी-लिखी और समझदार होंगी वे किसी बात के महत्व को नहीं समझती अथवा जैसा कि किसी ने कहा है कि वे निपट मूर्ख हैं। मैं अभी जिन महिलाओं के बारे में बात कर रहा था। उन्होंने मुझसे बहस करनी शुरू कर दी और बोली कि हमें ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिये जिससे कि पूरे समाज का ताना-बाना ही टूट जाये। सिविल मैरिज एक्ट पारित करके एक राह बना दी है। जो लोग सिविल मैरिज करेंगे वो तलाक भी करेंगे। अब और आगे क्यों जाते हैं। जो रिवाज़ हैं उन्हें रहने दें। हम यह नहीं कहते कि फला आदमी को ऐसा नहीं करना चाहिये। धीरे-धीरे आदमी समझने लग जायेंगे।
श्री कुंजरू ने एक पत्नीत्व की बात कही है। लोगों की माली हालत यह है कि ढंग से रह नहीं सकते। कितने लोगों को तो एक पत्नी को संभालना मुश्किल हो रहा है, दो कहां से संभालेंगे। मुसलमानों में चार पत्नियां रखने की इज़ाजत है लेकिन क्या प्रत्येक मुसलमान की चार पत्नियां हैं? बहुत कम जगह दो होंगी और शायद ही कहीं चार हों। इसके कोई आंकड़े तो मुझे मिले नहीं। अभी हमारा आंकड़ा शास्त्र विभाग बहुत कमज़ोर है। अब प्रश्न यह है कि मुसलमानों में यह चार बीवियां रखने का रिवाज़ कैसे पड़ा? हज़रत मुहम्मद साहब ने जब ओहद की लड़ाई लड़ी और उस समय बहुत से आदमी मारे गये और समाज में औरतें ही औरतें रह गयीं। तब उनकी हिफाज़त करने के लिए यह हुक्म दिया गया था कि आप लोग जो चार तक संभाल सकते हैं चार औरतें रख लें। ऐसा जर्मनी और फ्रांस में भी