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अलग-अलग समय पर होता रहा है। अपने यहां तो कोई ऐसी बात है नहीं। अपने यहां तो करीब-करीब समता है। थोड़े से पुरुष ज़्यादा होंगे। औरतें थोड़ी सी कम हैं। कुछ हजार कम हैं।
(पंडित ठाकुरदास भार्गव अध्यक्ष पद पर आसीन)
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लेकिन अगर दुर्भाग्यवश ऐसा हो जाये कि दो करोड़ औरतें ज्यादा बढ़ जायें तो समय के अनुसार कुछ और कानून निकालना पड़ेगा। मैं गहराई में इसलिए जा रहा हूँ क्योंकि हमारे कानून देश और काल के अनुसार बने हुए हैं और बन रहे हैं और अब भी डॉ. अम्बेडकर साहब वैसा कानून बनाना चाहते हैं। लेकिन वह अच्छा कानून बनायें और ऐसा कानून बनायें जो कि दोषरहित हो। हमारे यहाँ विवाह सिर्फ सहूलियत के नहीं है। हमारा समाज सिर्फ अर्थवाद पर ही अवलम्बित नहीं है। उसका आधार हमारे पुराने शास्त्र हैं। कृषिशास्त्र, पशुशास्त्र और समाजशास्त्र इन तीनों को ध्यान में रखकर हमने अपने समाज को बनाया है। मैं कहता हूँ जैनिसिस (उत्पत्ति शास्त्र) की दृष्टि से घोड़ा और गधा एक ही प्रकार के जीव हैं जैसे हम सब मनुष्य हैं। लेकिन अलग-अलग देश के अलग-अलग तरह के मनुष्य हैं। जो जैसी हवा और वातावरण में पलता-बढ़ता है वो वैसी हवा और वातावरण को पसन्द करता है और प्राणियों का भी यही हाल है। आप हिसार के प्राणियों को दूसरी जगह ले जाइये और देखिये कि उनकी क्या हालत होती है। अजी आप पेड़ों को ही लीजिये। एक ऐसे को जो कश्मीर की आबोहवा में पनप सकता है उसे आप राजस्थान में ले जाइये। क्या वह वहां पनप सकता है? राजस्थान में बहुत कोशिश की गयी कि वहां आम लाया जाये, लेकिन होता ही नहीं है। क्यों? उसमें भी कुछ शास्त्र है। कुछ भूमि की बात है, कुछ बीज की बात है, कुछ पानी की बात है, कुछ हवा की बात है। इन चीजों के संयोग से ही कोई चीज पैदा होती है। ऐसा नहीं कि किसी पौधे को कहीं भी लगा दो और वह वृक्ष बन जाये। यह लग्न और विवाह-शादी की बात ऐसी नहीं है कि किसी को भी किसी के साथ बिठा दें। पेड़ों तक में यह देखना होता है कि कौन से पेड़ में कौन-सी कलम हो सकती है वगैरह-वगैरह।
खैर, मैं उसमें नहीं जाना चाहता हूँ। मैं तो यह कहना चाहता हूँ कि हमारा समाज पोलिटिकल (राजनीतिक), एजूकेशन (शैक्षिक), हाइजीनिक (आरोग्य संबंधी), यूजेनिक (प्रजनन शास्त्र), और सेक्सॉलोजिकल (कामशास्त्र), चीजों पर आधारित है। इसके लिए अगर आप कुछ प्रमाण चाहते हैं तो मैं डॉ. भगवान दास के उस भाषण का एक अंश पढ़ कर सुनाता हूँ जो उन्होंने हिंदू विवाह मान्यता विधेयक प्रस्तुत करते समय दिया था। अपने भाषण में उन्होंने हिंदू शास्त्र की बहुत सी बातें बताई थीं। उन्होंने कहा था, ‘‘आरोग्य विज्ञान, प्रजनन एवं काम शास्त्र के जो सिद्धांत हैं उनमें