हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 308

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श्री श्यामनंदन सहाय : इसी सदन में गुप्त मतदान हो तो यहीं खत्म हो

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जाएंगे।

श्री भट्ट : आपको डर यह है कि आप लोगों के सामने यह बात नहीं रख सकते। हर बात लोगों के सामने रखने वाला एक ही व्यक्ति था और वह थे : महात्मा गांधी। गांधी जी ने माना कि अस्पृश्यता हमारे देश से जानी चाहिए। जब पूँजीपतियों ने कहा कि हम आपका बहिष्कार करेंगे और जब तिलक स्वराज फंड के लिये पैसा जुटाने महात्मा जी बम्बई की मूलजी जेठा मार्किट गये और वहां कहा कि इस फंड के वास्ते हमें एक करोड़ रुपया चाहिए तो पूँजीपतियों ने कहा कि हम एक करोड़ क्या आपको पांच करोड़ देने को तैयार हैं, परन्तु महात्मा जी आप एक बात को छोड़ दीजिये, और वह बात अस्पृश्यता की बात है। इसको आप अपने कार्यक्रम में से निकाल दीजिये। इस पर महात्मा जी ने कहा कि मुझे आपके पांच करोड़ तो क्या आपकी एक पाई भी नहीं चाहिए। मैं अपने सिद्धांतों पर अडिग हूँ और उन्हीं से स्वराज हासिल करूंगा। हमारी सरकार का दायित्व है कि वह हमको समझें। हम लोग साधारण बुद्धि के आदमी हैं, शास्त्रों का इतना गहराई से हमने अध्ययन नहीं किया है। परन्तु आपके पास तो बुद्धि है। आप उसके बल पर हमारे पंडितों के पास जाइये, शंकराचार्य जी के पास जाइये जो इसका विरोध कर रहे हैं, और आप उन बहनों के पास जाकर समझाइये जो इसका विरोध कर रही हैं और जिनका संसार आप सुखी करना चाहते हैं। आखिरकार क्या यह विधेयक केवल हमारी बहनों के भले के लिए है, मैं यह नहीं मानता। यह तो आप सारे समाज के भले के लिए कह रहे हैं और इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ। लेकिन डॉ. साहब आप इस बात को ध्यान में रखें कि हम यहां किसी नये विषय पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। सन् 1942 क्या, सन् 1937 में डॉ. देशमुख एक विधेयक लाये थे। इस मुद्दे पर तब से विचार हो रहा हे। 1856 में विधवा पुनर्विवाह से संबंधित सुधार ईश्वर चन्द्र विद्यासागर और राजा राममोहन राय ने शुरू किये थे। धीरे-धीरे ये बातें होती रही हैं। हमारे स्मृतिकार और भाष्यकारों ने भी इस विषय पर अलग-अलग बातें कहीं है और कहते रहे हैं। मैं यह नहीं कहता कि आप कोई कानून नहीं बनाइये। लेकिन आप आज क्यों बनाने जा रहे हैं? आप इतना अधीर क्यों हो रहे हैं?

मेहरबानी करके थोड़े समय के लिए और ठहर जायें। चुनाव होने वाले हैं और मई में नयी पार्लियामेन्ट आ जायेगी। तब आप अच्छे से अच्छा विधेयक लाइये और कानून बनाइये। हो सकता है हम में से कुछ सदस्य पुनः निर्वाचित हों। अगर मैं पुनः इस सदन में आया तो मैं अवश्य ही चर्चा में भाग लूँगा। लेकिन आप उसके पहले जनता के सामने इस विधेयक का अंतिम प्रारूप रखिये। यह नहीं कि आप अधूरा विधेयक