हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 309

294 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सामने लाएं और फिर कहें कि, ‘‘अरे गोकुल भाई, इसे पारित करवा दो।’’ यह चीज मैं नहीं चाहता हूँ। मैं तो चाहता हूँ कि जो खुराक आप दें वह होलसम (सम्पूर्ण) दें, मुझे गन्दी चीज़ आप न दें कि यह खा लीजिये, यह तो राशन के चावल हैं, यह ऐसे ही मिलेंगे। मैं ऐसी चीज़ नहीं चाहता हूँ। मैं अच्छी चीज खाऊंगा। यह बात ठीक है भूखा करता क्या न करता लेकिन जब मुझे दूसरी चीज मिलती है तो उसे खाऊंगा। मुझे पत्ते मिलते हैं तो वह खाकर रहूँगा लेकिन गली-सड़ी चीज पेट में नहीं डालूँगा। इसलिए मैं आप से प्रार्थना करता हूँ कि मेहरबानी करके इस विधेयक को मुल्तवी रखें। इसमें आपने हमें तरजीह दी है इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ। आपकी इस सूझ-बूझ के लिए आपको मुबारकबाद है। आखिर आपने समय को पहचानते हुए यह काम किया है। अब एक कदम आगे आप और बढि़ये और उदार हो जाइये। मैं अपनी बहनों से भी कहना चाहता हूँ कि अगर यह चार महीने बाद पारित होगा तो क्या ख़तरा है, और चार महीने पहले पारित हुआ तो इसमें आपको क्या मिल जाने वाला है, इस चार महीने में आपको क्या लाभ होने वाला है इसके पारित होने से न तो कोई आसमान गिरता है, न कोई नुकसान होता है, और न कोई करोड़ों रुपये आकर बंटने वाले हैं। इसीलिए मैं आपसे प्रार्थना कर रहा हूँ।

अब कारखाने वाले आदमियों की बात पर फिर आता हूँ। वो चाहते हैं कि तलाक रिवा़ज के मुताबिक हो। तो रिवाज क्या चीज़ है? रिवाज का बहुत प्रभाव है, इस बात से तो डॉ. साहब भी इंकार नहीं करेंगे। लेकिन इस में अगर मेरा कोई विरोध है तो वह यह है कि आप उस रूढि़ को, उस रिवाज को कतई निकाल देना चाहते हैं। कम से कम कुछ साल के लिये तो यह चीज नहीं चलेगी। अगर आप पिछड़ी हुई जातियों को, अपने साथ ले जाना चाहते हैं तो आपको अपनी रफ्तार कम करनी होगी। आप अपनी रफ्तार कम करेंगे तभी हम आपके पीछे-पीछे चल सकेंगे। महात्मा गांधी प्रगतिवादी विचारधारा के थे। जिस दिन हमारे एम. एन. राय, फै़जपुर कांग्रेस में आये और महात्मा जी से साम्यवाद की चर्चा करने बैठे तो सुना है महात्मा जी ने कहा कि ‘‘मिस्टर राय आप अपने कड़े से कड़े शब्दों में आज के समाज के बारे में, आज के पूँजीपतियों के बारे में, जो कुछ कहना है कह दीजिये।’’ तो उन्होंने बहुत देर तक बहुत ही कड़ाई से भाषण दिया। लेकिन महात्मा जी ने फिर कहा, बस इतना ही आपको कहना था। बाद में महात्मा गांधी जी ने उसका चन्द मिनटों में, चन्द शब्दों में जवाब दिया। एम. एन. राय दांतों तले उंगली दबा कर खड़े रह गये, कि महात्मा जी आप ऐसा मानते हो। महात्मा जी ने कहा कि ‘‘अभी आप मेरे बारे में भलीभांति नहीं जानते हैं। मेरे जितने विचार हैं वे जैसे-जैसे समाज आगे बढ़ता जायेगा वैसे-वैसे उसके सामने रखता जाऊंगा। मैं जानता हूँ कि मेरा समाज बहुत पिछड़ा हुआ है, अभी उस में कई तरह के विचार इतने विकसित नहीं हुए हैं जितने