हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 311

296 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

का जो भाषान्तर किया, उस भाषान्तर से मैं कभी खुश नहीं हुआ, क्योंकि मेरा सदैव से ऐसा प्रयत्न रहा है और मैंने अपने कॉलेज जीवन में यह निश्चय किया कि जब तक मैं बंगाली न सीख लूँगा, तब तक मैं रवीन्द्रनाथ की गीतांजलि नहीं पढूँगा। मेरा हमेशा से यह ख्याल रहा है कि जब तक मूल भाषा जिसमें वह लिखी गई हो, चाहे वह कोई भाषा हो, उसका ज्ञान न हो, पढ़ना व्यर्थ है। तमिल मैं अभी तक सीख नहीं पाया हूँ, लेकिन उसको सीखने का प्रयास करूंगा, ऐसी मेरी आदत हैं। रवीन्द्रनाथ की गीतांजलि जो बंगाली में मैंने पढ़ी और ईट्स ने जो उसका भाषान्तर किया उसे पढ़ा तो पाया दोनों में बहुत फर्क है। ईट्स के भाषान्तर में कुछ नहीं है। उससे तो हमारी देशी भाषाओं में- जैसे मराठी में एक ने अभंग उपनाम से गीतांजलि का अनुवाद किया है, वह बहुत सुन्दर है। लेकिन दुर्भाग्य से, हम भारतवासी तो आंख बन्द किये बैठे हैं और जब बाहर वाले हमको कुछ दिखाते हैं, तो कहते हैं : ‘हां, यह खूब दिखाई दिया।’ मैं पूछना चाहता हूँ कि विदेशों की रोशनी में आखिर कौन-सी ऐसी फ्लड लाइट है कि उससे हमारी आंखें चुंधिया जाती हैं और उनकी तारीफ करने लगते हैं। हमारी अपने देश की रोशनी में आखिर क्या कमी है? मैं चाहता हूँ कि इस चीज़ को ठीक ढंग से समझ कर फिर उसमें जो परिवर्तन करना हो खुशी से करें जिस से हर एक आदमी खुश हो जाये और जिसमें सब का भला हो।

अब मैं इस विधेयक पर आता हूँ कि यह हिंदू क्या है और यह हिंदू शब्द निकला कहां से? सभापित जी, मुझे माफ कीजिये, मैं कुछ मिनट और लूँगा। मैं यह कह रहा था कि उन इतिहास की बातों में नहीं जाना चाहता हूँ, मैं ग्रीस और ईरान देशों के इतिहास में नहीं जाना चाहता हूँ। हमारा ईरान और ग्रीस देश से क्या सम्बन्ध रहा था, उसमें इस समय मैं नहीं जाना चाहता हूँ, लेकिन यह बतलाने की अवश्य कोशिश करूंगा कि आखि़र यह ‘हिंदू’ शब्द कहां से आया। मेरा जो संशोधन है, उसका पूरा-पूरा ताल्लुक इस चीज़ से है। कहा जाता है पहले गांधर्व देश में दो नगर थे, उसमें एक नगर का नाम हिन्दस था जिससे हिंदू शब्द निकला। दूसरी विचारधारा यह है कि इस मुल्क में जो बड़ी नदी सिन्धु नदी है, उस में ‘स’ और ‘ह’ भाषा शास्त्र की दृष्टि से एक हो जाते हैं और इसीलिये किसी ने कहा कि यह हिंदू शब्द सिन्धु नदी के नाम से निकला है। ‘हिन्दुआनी’ शब्द भी कई जगह इस्तेमाल किया गया है। वह हिन्दुआनी शब्द कहां से आया, यह पता लगाना मुश्किल है। अपनी केन्द्रीय सचिवालय की लायब्रेरी में मैंने देखा तो पाया कि यह बहुत गरीब़ लायब्रेरी है। ऐसी गरीब लायब्रेरी मैंने कहीं नहीं देखी। वहां मैंने इसके मुतल्लिक़ किताबों के बारे में पूछा तो बतलाया गया कि यहां तो इसके बारे में कुछ खा़स संग्रह नहीं है, इसके बारे में कुछ पत्रिकाओं के वार्षिक अंकों में निकले लेख तो हैं, लेकिन उसके अलावा वहां और कुछ नहीं है। इसके विपरीत अगर मैं रायल ऐशियाटिक सोसाइटी