हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 314

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श्री भट्ट : इसलिए मुझे उम्मीद है कि माननीय कानून मंत्री इस धारा में भी कुछ वैसा ही प्रावधान रखेंगे जैसाकि उन्होंने उपरोक्त धारा में किया है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो इसका अर्थ बहुत ही सीमित हो जायेगा। तत्कालीन सदस्य-गृह विभाग श्री हेनरी क्रैक ने अपने भाषण में इसका जि़क्र करते हुए कहा था :

‘‘मेरे विचार से इस पर अत्यधिक सावधानीपूर्वक विचार किये जाने की आवश्यकता है। क्योंकि किसी व्यक्ति को ऐसे नियम या कानून के बारे में जिसकी उसे पूरी जानकारी नहीं हो, वो विकल्प का अधिकार देना या उसे बाध्य करना ठीक नहीं होगा।’’

श्री बी. दास (उड़ीसा) : मेरी समझ में सर हेनरी क्रैक बैचलर थे उन्हें समाज की समझ नहीं थी।

श्री भट्ट : मैंने यह अंश 1937 के वाद-विवाद, ग्रन्थ-3 की पृष्ठ संख्या 2544 से लिया है। इसलिए, मैं यह अजऱ् करना चाहता हूँ कि हमें भी इसमें इस तरह की तारीफ़ करते है। आप उस एक्ट को देख लीजिए बड़ौदा हमसे बहुत आगे है, उनसे पूछ कर देखिये वे कितना आगे हैं? उनसे यह पूछ कर देखिये कि उन्हें क्या सहूलियतें हैं उनकी दिक्कतें क्या हैं? अपने कानून को कैसे लागू करते हैं। शायद वे कहेंगे कि पहले जमाना बहुत अच्छा था। मेरा यह सब कहने का कोई खा़स मक़सद नहीं है। मैं तो बस यह कहना चाहता हूँ कि जहां तक सामाजिक कानूनों का ताल्लुक है, मैसूर देश से बहुत आगे है और यदि मैं गलती नहीं करता हूँ - मेरे मैसूर के मित्र मुझे माफ करेंगे - सर सयाजी राव गायकवाड़ पहले व्यक्ति थे जिन्होंने मैसूर और दूसरे राज्यों से बहुत पहले शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुधार किये थे।

डॉ. अम्बेडकर : बड़ी गलती की।

श्री भट्ट : हम लोग जो राजस्थान के रहने वाले हैं उनको आप बहुत आगे ले जाना चाहते हैं। हम देखते हैं कि हम तो धीरे-धीरे चलने वाले हैं। हमारी चाल तो ऊंट की चाल है, आपकी गति वायुयान की है। ऊंट वायुयान के साथ नहीं चल सकता है। इसलिये ज़रा वायुयान को भी धीरे कर दीजिये। इस बड़ौदा हिंदू संहिता में भी लिखा हुआ है कि : ‘‘यह अधिनियम बड़ौदा राज्य के अधिवासी उन सभी व्यक्तियों पर लागू होगा :

(अ) जो जन्म से, अथवा धर्म परिवर्तन के कारण अथवा जिन पर इस अधिनियम के द्वारा इस अधिनियम का कोई भाग उस सीमा तक जहां तक यह लागू हो सकता है लागू किया गया हो, हिंदू है।

व्याख्या : (1) वे लोग, जिन पर हिंदू विधि अथवा उसका कोई अंश रिवाज तथा प्रथा से लागू होता है, हिंदू कहे जायेंगे।’’