हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 315

300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री श्यामनंदन सहाय : यह कौन-सी संहिता है।

श्री भट्ट : बड़ौदा हिंदू संहिता।

श्री श्यामनंदन सहाय : एकल विवाह अधिनियम।

श्री भट्ट : जी उसमें लिखा है, ‘‘वे हिंदू जिन पर हिंदू विधि अथवा उसका कोई भाग रिवाजों अथवा प्रथाओं से लागू होता है, उन मामलों में जहां तक हिंदू विधि अथवा इसका कोई भाग प्रयुक्त अथवा सम्बन्धित है इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये हिंदू समझे जायेंगे।’’

आप कहते रहते हैं कि यह जिस किसी पर लागू होगा वह हिंदू माना जायेगा चाहे वह हिंदू धर्म स्वीकार करता हो या न करता हो। लेकिन मैं कहता हूँ कि हिन्द के रहने वाले सभी हिंदू हैं। मैं संस्कृति की दृष्टि से नहीं कह रहा हूँ। मैं अंग्रेजी की दृष्टि से भी कह रहा हूँ। आप हमें भारतीय क्यों कहते हैं, हिन्दुस्तानी क्यों कहते हैं? इसलिये हिंदू शब्द भी सीमा का सूचक है, धर्म का सूचक नहीं और चँकि वह हिंदू धर्म का सूचक न होते हुये सीमा का सूचक है इसलिये इसका तो यह अर्थ है कि जो भी इस देश में रहते हैं उन सब का इस में समावेश है। आप इस पर गौर करें :

‘‘(ख) जिन्होंने हिंदू कानून को मानने से इनकार नहीं किया है, वे हिंदू समझे जायेंगे।’’

इसलिये मैं अपने माननीय मंत्री से कह रहा हूँ कि आप इस प्रकार के संशोधन को मान लीजिये। अब मैं जो एक थोड़ा-सा हिस्सा बाकी रह गया है उस पर आता हूँ।

श्री जे. आर. कपूर : विशेष रूप से किस संशोधन का समर्थन कर रहे हैं?

श्री भट्ट : जो मेरा संशोधन है अर्थात् ‘‘दोज़ हू वान्ट टू बी गवर्न्ड’’ जो शासित होना चाहते हैं इसमें वह सारी बात आ जाती हैं जो मैं चाहता हूँ।

अब मैं एक और बात की तरफ ध्यान दिलाना चाहता हूँ। जैसा कि हमारे माननीय गाडगिल साहब ने और कुंजरू साहब ने भी इस विषय में कहा है। जब शारदा ऐक्ट अर्थात् बाल विवाह निरोध अधिनियम पहले सन् 1928 में आया था। तब उसका नाम बाल विवाह विधेयक था। लेकिन सन् 1929 में जब प्रवर समिति की रिपोर्ट आई तब उसमें फेरबदल कर दिया गया। विधेयक का नाम निरोध विधेयक रखा गया। आप जानते हैं कि उस प्रवर समिति में मुसलमान भी थे और उन्होंने इसका विरोध किया