302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
गयीं। लेकिन उनके लिए कुछ सजा रख दी गयी। अब आगे देखिये :
‘‘यह विधेयक, जैसा कि पुनःस्थापित किया गया था हिंदू, जैन, सिख, ब्रह्मसमाजी, आर्यसमाजी तथा बौद्धों पर लागू होता था तथा विवाह की वैधता के सम्बन्ध में था। क्योंकि हम विधेयक में संशोधन प्रस्तावित कर बाल-विवाह में भाग लेने वालों के लिये दण्ड की व्यवस्था कर रहे हैं। इसलिए यह उपयुक्त लगता है कि इसे उपरोक्त सम्प्रदायों तक ही सीमित रखा जाये क्योंकि बाल-विवाह दूसरे सम्प्रदायों में भी होते हैं यद्यपि उतने अधिक नहीं, इसलिये हमारा प्रस्ताव है कि प्रस्तावित विधेयक सामान्य हो और वह ब्रिटिश भारत के सभी सम्प्रदायों व वर्गों पर लागू हो।’’
उन्होंने यह इतना बड़ा बदलाव किया। साज का रुख देख कर यह हुआ। माननीय विधि मंत्री भी साज का रुख देख कर आगे चलेंगे ऐसी मेरी उन से प्रार्थना है। ईसाई विवाह अधिनियम को ही देख लीजिये कि उसमें भारतीय ईसाइयों के लिये क्या कहा गया है, पारसी अधिनियम को देखिये उसमें क्या कहा गया है और वहां भी पारसी किस को माना गया है। उसकी परिभाषा कितनी संकुचित की गई है। पारसी वह है जो जोरास्ट्रियन धर्म को मानते हैं। अपने यहां तो कई तरह के देवी-देवता हैं, कोई कुछ मानता है। इसलिये मैं कहता हूँ कि आप सब को ही हिंदू मान लीजिये।
यह जो शारदा कानून है वह (ख) श्रेणी के राज्यों में अभी तक लागू नहीं हुआ है। सन् 1950 के संशोधन के अनुसार भी उसे जो अपने राज्य में लागू करना चाहें, कर सकते हैं, क्योंकि यह समवर्ती सूची में है। जो चाहेंगे वह लागू कर लेंगे। लेकिन अभी तक वह (ख) श्रेणी के राज्यों में लागू नहीं है।
श्री बी. दास : आशा है डॉ. अम्बेडकर इस पर ध्यान देंगे।
डॉ. अम्बेडकर : वह सब रद्द हो जायेगा।
श्री भट्ट : तो मैं मंत्री महोदय से तलाक़ के बारे में अजऱ् कर रहा था। मैं उनसे बड़े अदब के साथ कहना चाहता हूँ कि जो रिवाज़ के मुताबिक चल रहा है उसको वे वैसा ही चलने दें। जो लोग सुधार चाहते हैं उनके लिये सिविल मैरिज का दरवाजा खुला है।
डॉ. अम्बेडकर : जिसका खुला है उसका भी बन्द कर दिया जाए।
श्री भट्ट : जिसका खुला है उसको बन्द न कीजिये। चाहे वह खिड़की से आते हों या दरवाजे से आते हों। लेकिन जिस बिरादरी में जो रिवाज है उसको चलने दीजिये, कम से कम हिंदू समाज के उन लोगों में जो कि शिक्षा में बहुत पीछे हैं माननीय कानून मंत्री ने हिंदू समाज का दौरा नहीं किया है। आप दौरा कीजिए।