हिंदू संहिता जारी.... खंड : 2 (संहिता की प्रयोज्यता) : जारी - Page 318

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आप लोगों को समझाइये, आप उनको अपनी किताबें दीजिये और फिर जब लोग समझ जाएं तब आप यह कानून लाइये। जो असली चीज है उसकी असलियत नहीं जा सकती। जो स्वर्ण है, वह पत्थर नहीं हो सकता, वह तो कंचन होने वाला है। तो आप स्वर्ण को कंचन बनने दीजिये और समय दीजिये कि लोगों को मालूम हो जाय कि यह तलाक क्या चीज़ है। तो आप हम में झगड़ा मत डालिये। जो सुधार चाहते हैं उनके लिये सिविल मैरिज ऐक्ट है और उसके ज़रिये तलाक हो सकता है। आप कहते हैं कि बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने सिविल ऐक्ट में विवाह नहीं किया है वह तलाक कैसे कर सकते हैं। उसके लिये मैं आपको एक सुझाव देता हूँ। आप उनको भी इजाज़त दे दीजिये कि वह भी सिविल मैरिज ऐक्ट के अनुसार रजिस्ट्रर करवा लें और फिर तलाक कर सकते हैं। इस तरह से उनके लिये अपनी पत्नियों के लिए बहुत बड़ा दरवाजा खुल जायेगा।

श्री आर. सी. उपाध्यक्ष : पति चाहे पर बीवी न माने तो।

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श्री भट्ट : बीवी तो पति की ही बात मानती है। वह चाहे पढ़ी-लिखी हो, लेकिन घर में जाकर तो यही होता है ‘पति देवो भवः’। लेकिन इसके माने यह नहीं है कि हिंदू स्त्रियों को गुलाम समझते हैं। वह गृहिणी है और वह देवी है। यह शब्द उनके लिये इस्तेमाल होते हैं। मैं यह नहीं समझता कि हिंदू समाज कोई ऐसा नीचा समाज है जो अपनी स्त्रियों को गुलाम समझता हो। अगर किसी के मन में यह बात हो तो यह बात अपने मन से निकाल देनी चाहिये। मैं कहता हूँ कि जितनी जातियां हैं जिनको हम पिछड़ी हुई जातियां कहते हैं उनके यहां भी घर का सारा कारोबार स्त्री के ही हाथ में रहता है और जैसे वह चलाती है वैसे ही पुरुष चलता है। हमारे राजस्थान में और दूसरी जगहों में भी बहुत से रीति-रिवाज हैं जो शास्त्र में शामिल हैं और उस शास्त्र को डोशी शास्त्र कहा जाता है। जो भी और जिस रीति से बुढि़या कहती हैं सब उसी रीति से होता है। अगर पंडित कहीं विवाह कराने में गलती कर जाय तो गीतों के माध्यम से फौरन सन्देश कर दिया जाता है कि पंडित ने गलती कहां की है। अगर सप्तपदी आदि में कहीं गलती हो जाये तो गीत से मालूम हो जायेगा की कहां गलती हो रही है। तो स्त्रियों के गीतों से वह सारे रिवाज चलते हैं। तो यह नहीं समझना चाहिये कि हिंदू समाज में स्त्रियों की इज्जत नहीं है।

हो सकता है कि शराब पीने वाला आदमी अच्छा हो, वह बड़ा आदमी हो, पढ़ा लिखा आदमी हो, लेकिन इस सबके बावजूद है तो शराब पीने वाला। शराब का असर, चाहे कोई भी व्यक्ति हो वह उसे पागल कर देता है। शराब पीने वाले व्यक्ति चाहे पिछड़ी जातियों के हों या अगड़ी जातियों के हां, स्त्री-पुरुष सभी निकम्मे होते हैं।