308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री ए. सी. शुक्ला : क्या सिखों ने अपने सम्मेलनों में हिंदू संहिता विधेयक के विरुद्ध कोई संकल्प पारित किया है?
सरदार बी. एस. मान : सिखों की समस्याओं के बारे में मैं माननीय सदस्य से बेहतर ढंग से बता सकता हूँ। यहां कुछेक महिलाएं हैं, और मैं कहता हूँ ऐसे महत्वपूर्ण मामले में महिलाओं की राय ली जाती है। इनकी बात सुनी जाती है, इनकी सलाह मानी जाती है; लेकिन इस सदन में सिख समुदाय के हम सात सदस्य हैं और मैं माननीय सदस्य को चुनौती देता हूँ कि वो सिख समुदाय का ऐसा एक भी सदस्य सामने ला दें जो पूरी तरह से इस विधेयक के पक्ष में हो?
श्री ए. सी. शुक्ला : बाहर जो सिख इसका समर्थन करते हैं?
सरदार बी. एस. मान : सदन में कई वक्ताओं ने बार-बार एक बात कही हैं कि हमें यह बिल सदन में बहुमत के आधार पर पारित नहीं करना है। हम इस पर जनमत-संग्रह करायें। यदि आप बहुमत की बात करते हैं तो सिखों के बीच जनमत संग्रह करने के लिये इसे भेज दें। जब तक जनमत संग्रह न हो जाये आप यहां इसे हिंदू समुदायों के बहुमत से पारित न करें। मैं कोई हिंदू नहीं हूँ। मैंने हिंदू कानून कभी नहीं मानें। मैं यह कहने पर मज़बूर हूँ कि यह कानून सिखों के धर्मान्तरण का कानून है। आप ऐसे-ऐसे आपत्तिजनक कानून ला रहे हैं, ऐसी नयी-नयी बातें ला रहे हैं जिन्हें कभी नहीं माना गया और जिनको गांवों में तो कभी किसी ने सुना तक नहीं। आप हमारे गले के अंदर वह सब ठूँस रहे हैं जो हमें नापसन्द है। ये जो दो-चार महिलाएं यहां बैठी हैं इनकी राय लेते हैं, इनकी बात सुनते हैं लेकिन हम सात सदस्य जो सिखों की इस राय के बारे में एकमत हैं कि उन पर ऐसा कुछ भी नहीं थोपा जाये जो उनके हितों के विपरीत हो और उनके लिए आपत्तिजनक हो, उसका कोई महत्व ही नहीं? मेरे मित्र शुक्ला जी पूछते हैं कि क्या सिखों ने इस आशय का कोई प्रस्ताव पारित किया है? अरे मेरी तकलीफ़ तो यह है कि सिखों की सुनी ही नहीं गयी। यह इसी बात से स्पष्ट है कि डॉ. अम्बेडकर को सिख संस्थाओं तथा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जो सिख समुदाय के वैयक्तिक कानूनों और धार्मिक विषयों पर बोलने वाली एकमात्र प्रामाणिक संस्था है, उससे कोई ज्ञापन प्राप्त नहीं हुए हैं।
सरदार हुकम सिंह (पंजाब) : कुछ सिख सम्मेलनों में इस संहिता (विधेयक) के खिलाफ संकल्प भी पारित हुए हैं।
सरदार बी. एस. मान : मेरे माननीय मित्र सरदार हुकम सिंह ने हमें अवगत कराया है कि इस विषय में संकल्प भी पारित हुए हैं। बहरहाल मूल विधेयक को पुरःस्थापित करते समय और प्रवर समिति का गठन करते समय न तो किसी सिख