हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 326

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* हिंदू संहिता-(जारी)

खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी

माननीय उपाध्यक्ष : चर्चा आरम्भ होने से पहले मैं यह कहना चाहता हूँ कि

खंड (2) पर वाद-विवाद होते हुये आज छः दिन हो गये हैं, लगभग सभी प्रकार के विचार व्यक्त हो चुके हैं। (व्यवधान) प्रत्येक माननीय सदस्य को बोलने की आज्ञा नहीं दी जा सकती है क्योंकि समस्त रूप से भी तथा खंडशः भी यह विधेयक सदन के समक्ष पर्याप्त समय से है। इसलिये हमें खंड 2 पर चर्चा अवश्य समाप्त कर देनी चाहिए। मैं माननीय सदस्यों से अनुरोध करूंगा, कि वे अधिक समय न लेकर अन्य सदस्यों को भी अवसर दें ताकि इस खंड पर वाद-विवाद समाप्त हो जाये। माननीय सदस्यों को चाहिये कि वे संक्षिप्त भाषण दें, क्योंकि अब तक इस विधेयक के सारे पहलुओं पर विचार हो चुका है।

सरदार बी. एस. मान (पंजाब) : कल जब सदन स्थगित हुआ था तो मैं यह कह रहा था कि सिखों को इस विधेयक की परिधि से बाहर रखा जाये। मेरा तर्क दो बातों पर आधारित है। पहली बात यह है कि 95 प्रतिशत सिख खेती-बाड़ी का काम करते हैं और फिर अन्य हिंदू-मुसलमान किसानों की तरह हम लोग ब्राह्मण विधि विधान द्वारा नहीं अपितु अपनी रीति-रिवाजों द्वारा शासित हैं। हमारे रीति-रिवाज इस संहिता में उपबंधित नियमों से पूरी तरह भिन्न हैं। दूसरा, मैंने कहा था कि इस सम्बन्ध में सिखों की राय नहीं ली गई है। मैं इसी विषय पर बोल रहा था।

मैंने सारे विधेयक को अच्छी तरह से देख लिया है, और बड़ी निराशा के साथ मुझे कहना पड़ रहा है कि सिख समुदाय के किसी भी प्रतिष्ठित महानुभाव ने इस विधेयक का समर्थन नहीं किया है। (एक माननीय सदस्य : प्रतिष्ठित कैसे?) लोग व्यवधान डाल रहे हैं पूछ रहे हैं, प्रतिष्ठित से क्या तात्पर्य है? सम्भवतः बहुत से माननीय सदस्यों को ज्ञात नहीं होगा कि हमारे सिख समुदाय का एक सांविधिक निकाय है, जो भारत सरकार द्वारा निर्मित कानून के अनुसार मतदान करती है। इस निकाय के 151 सदस्य हैं जो गुरुद्वारों के प्रबंधन तथा धार्मिक नियमों के प्रशासन में सारे सिख समुदाय प्रतिनिधित्व करते हैं। इस निकाय का नाम शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति है। हो सकता है सभा में बैठे कुछ लोग यह सोचते हों कि इसमें कट्टरपंथी सिखों का बोलबाला है लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आजकल इस समिति के प्रधान जत्थेदार ऊधम सिंह नागोके हैं, जो कि एक कट्टर कांग्रेसी है समिति में कांग्रेसियों की भरमार है। इस तरह यह निकाय जो कट्टरपंथी

* संसदीय वाद-विवाद, खंड- XV, भाग- II, 19 सितंबर, 1951 पृष्ठ 2841-98