हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 327

312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नहीं है और जो एक सांविधिक कानून द्वारा अस्तित्व में आया है उस निकाय ने भी इस विधेयक का प्रबल विरोध किया है। मैं कहता हूँ कि सिखों के मामले में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक समिति की राय से अधिक प्रतिनिधात्मक और कुछ नहीं हो सकता, विभिन्न सिख सम्मेलनों और सभाओं में इस विधेयक के विरुद्ध जो राय दी गयी है आप उसकी बात तो जाने दीजिये।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री) : विधेयक के विरुद्ध कहां राय

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प्रकट की गयी?

सरदार बी. एस. मान : सदन के बाहर। मैं सरकार से कहता हूँ कि वह एक नियम अपनायें, या तो इस विधेयक को पारित कर दें क्योंकि यदि सरकार को विश्वास हो कि भिन्न-भिन्न जातियों और समुदायों के जो प्रतिनिधि यहां हैं वे इसे चाहते हैं, अथवा सरकार यह सोच ले कि इस सदन के सदस्य रूढि़वादी हैं और वे जनता का, जो इस विधेयक को चाहती है, प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इन दोनों बातों में से सरकार को एक बात करनी चाहिये। हम सिख जाति का प्रतिनिधित्व करने वाले यहां पर छः सदस्य हैं।

(एक माननीय सदस्य : कल आपने सात कहा था।)

सातवां सदस्य उत्तर प्रदेश से है। यदि आप उनकी राय के मुताबिक काम करना चाहते हैं। तो मैं उनके लिये भी तैयार हूँ हालांकि मैंने उनकी राय नहीं ली है, फिर भी उनके एक कृषक होने के नाते मैं जानता हूँ वह क्या कहेंगे। हम छः सदस्य यहां पर पैप्सू तथा पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं। आप यह नहीं कह सकते कि हम सब एक ही दल के सदस्य हैं। हम में से मंत्री भी है, एक निर्दलीय सदस्य भी हैं सरदार सुचेत सिंह, कांग्रेस पार्टी से सांप-नेवले का वैर मानने वाले अकाली नेता सरदार हुकम सिंह जी हैं और एक कांग्रेस सदस्य सरदार गुरमुख सिंह मुसाफिर भी हैं। हम में सभी विचारों के सदस्य हैं। इसीलिये मैं सरकार से पूछता हूँ कि उसकी यह धारणा किसकी राय से बनी है कि सिख इस विधेयक को चाहते हैं। मैं डंके की चोट पर यह कहता हूँ कि हम सब इस विधेयक के विरुद्ध हैं और जैसे आपने ईसाइयों पर उसे जबर्दस्ती नहीं थोपा है, वैसे ही इसे सिखों पर भी मत लादिये। ईसाइयों की संख्या भी लगभग उतनी ही होगी जितनी पंजाब में हमारी है। आपने ईसाइयों को तो छूट दे दी है लेकिन हमें नहीं देना चाहते। अपने समुदाय के प्रतिनिधि होने के नाते हम कहते हैं कि हम इस विधेयक को नहीं चाहते। मैं माननीय विधि मंत्री तथा राज्य मंत्री श्री त्यागी से कहूँगा, कि वह मुझे सिख सम्प्रदाय की ऐसी एक भी राय दिखायें जो इस विधेयक का समर्थन करती हो। (व्यवधान)