खंड 2 : (संहिता का प्रयोग) - Page 33

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. खंड-2 के उपखंड (3) को हटाएँ।

  2. खंड-2 के उपखंड (4) को हटाएँ।

  3. खंड-2 के उपखंड (4) के बाद जोड़े :-

‘‘(5) इस धारा के बावजूद संहिता केवल उन्हीं क्षेत्रों, व्यक्तियों या वर्ग पर

लागू होगी जब तक कि जरूरत पड़ने पर कोई राज्य किसी भी समय या

किसी परिस्थिति में राज्य विधानसभा द्वारा समय-समय पर कोई कानून न

बनाए।’’

  1. खंड-2 में निम्नलिखित परन्तुक जोड़ें :-

‘‘यद्यपि ऊपर दिए गए खंड के रहते हुए भी ‘यह संहिता किसी भी व्यक्ति पर तब तक लागू नहीं होगी जब तक कि ऐसा व्यक्ति इसके बाद संसद द्वारा निर्दिष्ट तरीके से ऐसे प्राधिकरण के पास इस संहिता के लागू होने के एक वर्ष के अन्दर, और एक नाबालिग के बालिक होने के एक वर्ष के अंदर अपना नाम पंजीकृत न करा ले।’’

  1. धारा-2 के स्थान पर :-

‘‘2. संहिता का प्रयोग : यह संहिता या इसका कोई भाग या भागों का हिन्दुस्तान के या भारत के उन सभी नागरिकों पर लागू होगा जो वयस्क होने की आयु होने पर लिखित में यह घोषित न करें कि वे इसके बाद इस संहिता या उसके किसी भाग या भागों जैसी की परिस्थिति होगी के अंतर्गत आते हैं, और ऐसी घोषणा को केन्द्रीय सरकार के द्वारा इस उद्देश्य से निर्धारित नियमों के अन्तर्गत पंजीकृत करें।’’

  1. श्री बनारसी प्रसाद झुनझुनवाला द्वारा प्रस्तावित संशोधन में खंड-2 के प्रस्तावित परन्तुक ऐसे शब्द जो ‘‘जब तक कि कोई व्यक्ति’’ दूसरों से प्रारम्भ न होते हों के अंत में,’’ के स्थान पर

‘‘जब तक कि ऐसा व्यक्ति जिसने वयस्कता की आयु प्राप्त करने के पश्चात् चाहे वह स्त्री हो या पुरुष ने लिखित में घोषित न किया हो कि वह इस संहिता के द्वारा शासित होगा और ऐसी घोषणा को केन्द्रीय सरकार द्वारा इस उद्देश्य से बनाए गये नियमों के अनुसार पंजीकृत न कराए।’’

श्री नजीरुद्दीन अहमद : महोदय मैं एक छोटा-सा रास्ता सुझाना चाहता हूँ।

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यहाँ बहुत से संशोधन हैं- जिनकी विषय-वस्तु लगभग एक ही प्रकार की है। मैं सोचता हूँ अगर वे सभी विषयों पर एक साथ चर्चा, होगी तो अव्यवस्था (भ्रांति) होगी