हिंदू संहिता-(जारी) खंड 2, (संहिता की प्रयोज्य लागू होना) - जारी - Page 330

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सरदार बी. एस. मान : यदि मैं यह सिद्ध कर दूँ कि हमारे और हिंदुओं के रिवाज पूर्णतया भिन्न हैं तो क्या हमें इस विधेयक के क्षेत्र से बाहर कर दिया जायेगा?

पंडित ठाकुर दास भार्गव : यदि कोई रिवाज युक्तियुक्त हैं तो डॉ. अम्बेडकर उसे अवश्य मानेंगे। (व्यवधान)

सरदार बी. एस. मान : लोग टोका-टाकी बहुत करते हैं, कोई कहता है कि यदि मैं उसे विश्वास करा दूँ तो वह मान लेगा। मुझे पता नहीं कि मैं ऐसे आदमी को समझा पाऊंगा जो समझने को राजी नहीं है। डॉ. अम्बेडकर कहते हैं कि उनको ऐसा विश्वास करा भी दिया जाये तो भी वह नहीं मानेंगे।

अब मैं ‘‘मायनेंज हिंदू लॉ’’ में से उल्लेख करता हूँ। इसमें हिंदू विधि पर बड़ी प्रामाणिक टिप्पणी की गई है-

इसमें लिखा हैः ‘‘जहाँ तक देहाती जातियों का सम्बन्ध है, पंजाब और उसके आस-पास का क्षेत्र एक मात्र ऐसा क्षेत्र है। जहां वे अपने प्राचीन गौरव के साथ रह रही हैं। संभवतः इसी क्षेत्र में आर्य सबसे पहले आये होंगे। फिर भी ऐसा लगता है कि ब्राह्मण धर्म यहां अपनी जड़ें जमा पाने में पूरी तरह असफल रहा और धार्मिक उन्माद यहां के धर्मनिरपेक्ष कानून में प्रवेश न पा सका।’’

जब हम इतने लंबे समय से मनु के अनुशासन से स्वतंत्र रहे हैं- तो क्या यह वक्त की ज्यादती नहीं होगी कि आज हम आधुनिक मनु के समक्ष घुटने टेक दें। यदि हम अभी तक ब्राह्मणवादी व्यवस्था के अधीन नहीं रहे और लंबे समय से हम पंजाब में धर्मनिरपेक्ष कानून को मानते आये हैं, यदि हमने अभी तक मनु के विधान अम्बेडकरवादी विधान को नहीं मानेंगे। (व्यवधान)। मैं मनु की इस बात के लिए सराहना करता हूँ कि कम से कम वह असली तो थे, लेकिन यह आधुनिक मनु, कितना पतन हो गया है इनका। यह तो असली है और न ही प्रगतिशील। (व्यवधान) आप पूछ रहे हैं आधुनिक मनु कौन हैं? मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि कौन है आधुनिक मनु?

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सरदार बी. एस. मान : पंजाब में सांप्रदायिक गुटों की कोई मान्यता नहीं होती है लेकिन इस विधि के पारित होने के पश्चात्, ‘पहली’ बार पंजाब में साम्प्रदायिक भावना घर करेगी। मैं आपको ‘‘माइनेज हिंदू ला’’ के नवें संस्करण का पृष्ठ 48 पढ़कर सुनाता हूँ जिसमें लिखा हैः

‘‘पंजाब के रिवाज़ों की जो विशेष बात सामने आती है वह यह है कि वहां ब्राह्मणवाद कभी सफल होते नहीं दिखा। तदनुसार, यदि कोई ऐसी प्रथा हमें दिखायी