316 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पड़े जो पंजाबियों और संस्कृति विधि में समान हो तो हमें यह नहीं समझना चाहिए इसकी उत्पत्ति ब्राह्मणवादी व्यवस्था से हुई होगी। पंजाब में प्रथागत कानूनों के परिपोषक ब्राह्मण नहीं हैं। इसके बारे में ठीक-ठीक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें जिरगा या कोई जनजातीय परिषद हो तो उसकी या फिर वृद्धजनों की सहायता लेनी ही पड़ेगी तो उससे पता चलता है कि ब्राह्मण विधि वहां पर कभी भी सफल नहीं हुई हैं। पंजाब में ब्राह्मण, रिवाजों के परिपोषक नहीं रहे हैं। आधारित विधि के बारे में ज्ञान प्राप्त करने के लिये हमें ग्रामों के वृद्ध जनों, परंपरागत समिति, जातीय परिषद अथवा जिरगा का आश्रय लेना पड़ता है।
श्री आर. के. चौधरी (आसाम) : प्रश्न तो यह है, कि क्या माननीय सदस्य एक पत्नीत्व प्रथा को चाहते हैं अथवा नहीं?
श्री त्यागी : इधर-उधर की बातों से क्या लाभ?
सरदार बी. एस. मान : प्रेस के जरिए झूठी खबरें फैलाई जा रही है कि सरकार अभी केवल विवाह तथा विवाह विच्छेद के सम्बन्ध में ही कार्यवाही करना चाहती है। क्या डॉ. अम्बेडकर ने कभी कहा है कि वह विवाह और विवाह-विच्छेद के अतिरिक्त अन्य सब बातों को निकाल देंगे। मैं तो विधेयक को पूर्ण रूप से ले रहा हूँ मैं यह मान कर चल रहा हूँ कि इसमें से कुछ नहीं निकाला जायेगा। मैं अपने माननीय मित्रों को चेतावनी देता हूँ कि वे धोखे में न रहें। एक बार सरकार ने आपके अंदर सुरक्षा की झूठी भावना भरी नहीं और आप विमुख हुए नहीं कि वह इसकी अन्य बातों को भी लागू करने में नहीं चूकेगी।
श्री आर. के. चौधरी : क्या पंजाब की परंपरावादी विधि के अनुसार एक ही पत्नी रखने की आज्ञा है? क्या आप इस विधि के पक्ष में हैं? आप इसका उत्तर दें?
सरदार बी. एस. मान : मैं एक-एक चीज का उत्तर दूँगा और प्रत्येक विधि के बारे में आपको बताऊंगा।
माननीय उपाध्यक्ष : हम अन्य विषय नहीं लेंगे। माननीय प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया था, कि हम केवल विवाह तथा विवाह-विच्छेद के सम्बन्ध में ही विचार करेंगे-माननीय सदस्य अपने स्थान पर बैठ जायें।
सरदार हुकम सिंह (पंजाब) : यदि अब यह मान लिया जाये तो क्या फिर जब दूसरे विषय सदन के सम्मुख आयेंगे इन पर विचार होगा। यदि यह मान लिया जाता है, तो अन्य सब विषयों को निकाल दिया जाये।
माननीय उपाध्यक्ष : यदि इस विधेयक को केवल विवाह तथा विवाह विच्छेद तक सीमित रखा जाये और अन्य विषय दूसरे विधेयक में लिये जाएं तो क्या माननीय