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सदस्य का यह विचार है, कि यह खंड सभी पर लागू होगा।
श्रीमती दुर्गाबाई (मद्रास) : माननीय सदस्य के इस वक्तव्य का, कि उत्तराधिकार सम्बन्धी खंडों को छोड़ दिया जायेगा, क्या आधार है? उनकी सूचना का स्रोत क्या है?
सरदार बी. एस. मान : माननीय महिला सदस्य ने ठीक ही कहा है कि विधेयक के अन्य खंड अभी छोड़े नहीं गये हैं और क्योंकि इनको छोड़ा नहीं गया है इसलिये इस विधेयक पर पूर्ण रूप से विचार करने का हमें अधिकार है।
श्री भारती (मद्रास) : प्रधानमंत्री तथा विधि मंत्री ने कहा है, कि विधेयक के अन्य अध्यायों पर समय इत्यादि न होने के कारण चर्चा नहीं हो सकेगी। हालांकि यह कोई अंतिम निर्णय नहीं है लेकिन वास्तविक स्थिति को दृष्टि में रखकर इसे आधिकारिक माना जा रहा है। यदि हम इस मामले के व्यावहारिक पहलुओं पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि 99 प्रतिशत दूसरे अध्यायों पर इस सत्र के दौरान बहस नहीं होगी। अन्य अध्याय सम्भवतः आगामी फरवरी तथा मार्च में लिये जायें। इस सत्र के दौरान उन पर चर्चा हो पाना बिल्कुल संभव नहीं है, यदि हम सब सम्मिलित होकर
खंड-2 को पारित कर दें तो यह बड़े सौभाग्य की बात होगी। अन्य सदस्यों से मेरा अनुरोध है कि सहयोग दें। कम से कम हम इस भाग को तो पारित कर दें। डॉ. अम्बेडकर को चाहिये कि वह आश्वासन दें कि इस सत्र में केवल विवाह तथा विवाह विच्छेद सम्बन्धी उपबन्ध ही पारित किये जायेंगे।
पंडित एम. बी. भार्गव (अजमेर) : क्या माननीय सदस्य को इस कार्य के लिए भारत सरकार ने निर्दिष्ट किया है।
माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य दोनों पक्षों की ओर से बोल सकते हैं।
डॉ. देशमुख (मध्य प्रदेश) : खंड-2 केवल विवाह तथा विवाह विच्छेद से सम्बन्धित नहीं हैं, वह साधारण रूप से सारे विधेयक पर लागू होता है। जब तक ऐसा कोई संशोधन स्वीकार नहीं कर लिया जाता है, जिससे कि स्पष्ट हो जाये, कि यह खंड केवल उपर्युक्त दोनों विषयों से ही सम्बन्धित है, तब तक माननीय सदस्यों को समस्त संहिता पर विचार करने से रोका नहीं जा सकता और फिर हमारे सामने ऐसा कोई संशोधन भी तो नहीं है।
श्री जे. आर. कपूर (उत्तर प्रदेश) : यदि खंड-2 इसी प्रकार अथवा संशोधित रूप से पारित भी कर दिया जाये तो भी हमें यह खुली छूट होगी कि तत्पश्चात् ऐसा
खंड जो दाय भाग तथा उत्तराधिकार के सम्बन्ध में हों, इसमें जोड़ दें और उसमें यह उपबन्धित कर दें कि संहिता का यह भाग किसी सम्प्रदाय विशेष उदाहरणार्थ